जगद्गुरु की उपाधि
देश में जहां पर कुछ लोग भगवा पर सवाल उठा रहे हैं शंकराचार्य के चयन पर भी जहां सवाल उठने लगे हैं वहीं ऐसे में कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम का तेरह अखाड़ों की मौजूदगी में जगद्गुरु की उपाधि अपने आप में एक नया इतिहास लिखने के लिए काफी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जगद्गुरु की ये उपाधि हासिल करने वाले आचार्य प्रमोद कृष्ण पहले संत हैं। जगद्गुरु बनने के बाद मुरादाबाद पहुंचे आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर हिंदुओं को बांटने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बदनाम करने और ब्राह्मïण ठाकुरों को लड़ाने की साजिश है। जगद्गुरु ने कहा कि उनका एजेंडा सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को 2027 में मुख्यमंत्री बनाना है। दरअसल, देश और प्रदेश में राजनीति के साथ-साथ भगवाकरण की जो राजनीति हो रही है उसको लेकर भी एक नई बहस शुरू हो गई है। दरअसल, आचार्य प्रमोद कृष्णम् एक ऐसा व्यक्तित्व है जो शुरू से ही सनातन को लेकर बहुत ही अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए जाने जाते हैं। वो सभी धर्मों का सम्मान भी करते हैं लेकिन अगर सनातन पर कोई बात आती है तो वो बेबाकी के साथ अपना पक्ष रखते हैं। यही कारण है कि आज आचार्य प्रमोद कृष्णम् एक ऐसी उपाधि से नवाजे गये हैं जो हरेक के नसीब में नहीं होती। दो दशकों से धर्म के लिए जो वो काम कर रहे हैं वो सभी के सामने हैं। दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सम्भल में कल्कि धाम की स्थापना की थी उसके बाद से आचार्य प्रमोद कृष्णम् कल्कि धाम को लेकर जिस तरह से सक्रिय हैं वो सभी के सामने है। अयोध्या के बाद अगर अब किसी धार्मिक स्थल की मान्यता होगी तो वो कल्कि धाम होगा। अयोध्या के बाद सम्भल एक बड़ा सनातन धर्म का सबसे अहम पड़ाव होगा। हमेशा सनातन को लेकर अपनी बेबाकी से बात रखने आचार्य प्रमोद कृष्णम् को श्री कल्कि धाम के स्थापना समारोह में धार्मिक अनुष्ठानों और संतो की मौजूदगी में उन्हें जगद्गुरु घोषित किया गया। विभिन्न अखाड़ों के संतो की मौजूदगी में प्रमोद कृष्णम् को चादर ओढ़ाकर पुष्प वर्षाकर अभिषेक किया गया। आज जहां शंकराचार्य होने का सुबूत मांगा जा रहा है ऐसे माहौल आचार्य प्रमोद कृष्णम् को ये उपाधि मिलना अपने आप में काफी अहम है। वास्तव में आचार्य प्रमोद कृष्णम् सनातन के लिए जहां काम कर रहे हैं वहीं मानवता के लिए हमेशा समर्पित रहते हैं। इस शेर के साथ मैं अपनी वाणी को विराम देता हूं-
जहां रहेगा रोशनी लुटाएगा,
किसी चराग का अपना मकां नहीं होता। जय हिंद