25 फरवरी को लांच करेंगे प्रभारी मंत्री
नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। जनप्रतिनिधियों का फोन ना उठाना अब अधिकारियों को भारी पड़ सकता है। ऐसा करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। उन्हें इसका जवाब देना होगा कि किन कारणों से उन्होंने जनप्रतिनिधि का फोन नहीं उठाया। इसके लिए प्रभारी मंत्री व समाज कल्याण राज्यमंत्री असीम अरूण ने जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान, शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली को अधिक उत्तरदायी बनाने के लिए एक पहल की है। उनकी पहल पर शासन स्तर से बेहतर समन्वय तंत्र संवाद सेतु को लागू करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। संवाद सेतु को 25 फरवरी को लांच किया जाएगा। इसके सम्बंध में प्रभारी मंत्री ने गाजियाबाद, कन्नौज और हरदोई के जिलाधिकारियों के साथ ऑनलाइन बैठक कर संवाद सेतु पर चर्चा की। इस योजना का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच सीधा, समयबद्ध और रिकॉर्ड-आधारित संवाद स्थापित करना है। बता दें कि अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के फोन न उठाए जाने का मामला विधानसभा में उठा। इसका जवाब राज्यमंत्री असीम अरूण ने दिया। जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने रूलिंग दी। इसको लेकर अब प्रभारी मंत्री ने बेहतर समन्वय के लिए संवाद सेतु की पहल की है। बता दें कि जिला स्तर पर कई बार जनप्रतिनिधि प्रभारी मंत्री के समक्ष इस मामले को उठा चुके हैं कि प्रशासनिक अधिकारी उनके फोन नहीं उठाते या उनके द्वारा उठाई गई जनता की समस्याओं पर गंभीरता नहीं दिखाते। पूर्व की बैठकों में जनप्रतिनिधि प्रमुखता से यह शिकायत प्रभारी मंत्री से कर चुके हैं। नई व्यवस्था के तहत जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के संवाद बेहतर हो सकेगा।
डयूटी, अवकाश की रखेगा जानकारी
यह कमांड सेंटर अधिकारियों की ड्यूटी, अवकाश, प्रशिक्षण की वास्तविक समय की जानकारी रखेगा। संबंधित अधिकारी उपलब्ध न होने पर वैकल्पिक अधिकारी का संपर्क दिया जाएगा। यह व्यवस्था सिर्फ सरकारी सीयूजी नंबरों, कार्यालय समय में लागू रहेगी।
हर जिले में बनेगा कमांड सेन्टर
इस नई पहल के तहत हर जिले में एक जिला संपर्क एवं कमांड सेन्टर बनाया जाएगा। अगर कोई अधिकारी किसी जनप्रतिनिधि का फोन नहीं उठाता तो निर्धारित दस मिनट बाद कमांड सेंटर में तैनात ऑपरेटर तत्काल अधिकारी से संपर्क करवाएगा। वार्ता के बाद फीडबैक लेकर रिकॉर्ड सुरक्षित भी रखा जाएगा ताकि आगे मॉनीटिरिंग की जा सके।
हर महीने होगी समीक्षा, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
संवाद सेतु के शुरू होने पर पद के अनुसार संपर्क तय रहेगा। इसमें सांसद और विधायक सीधे जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक और जिला स्तरीय अधिकारियों से बात करेंगे। जिला पंचायत अध्यक्ष और महापौर संबंधित मुख्य विकास अधिकारी और श्रेणी-1 अधिकारियों से और अन्य स्थानीय निकाय प्रतिनिधि एसडीएम, सीओ या ब्लॉक स्तर के अधिकारियों से ही संवाद करेंगे। हर महीने समीक्षा कर तुरंत प्रतिक्रिया देने वाले अधिकारियों को ‘प्रशंसा पत्र’ और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
डिजिटल सॉफ्टवेयर से होगी मॉनिटरिंग
संवाद सेतु को संचालित करने के लिए कमांड सेंटर पर 3 प्रशिक्षित ऑपरेटर तैनात रहेंगे। स्मार्टफोन और कॉल रिकॉर्डिंग व्यवस्था होगी। पूरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए ‘संवाद ट्रैकिंग सॉफ्टवेयर’ या एक मोबाइल ऐप विकसित किया जाएगा, जिसमें कॉल समय, रिस्पॉन्स टाइम, उपलब्धता और फीडबैक दर्ज होगा, इस आधार पर ‘रिस्पॉन्स स्कोरकार्ड’ रिपोर्ट भी बनेगा। डेटा की पहुंच केवल जिलाधिकारी व नोडल अधिकारी तक सीमित रहेगी।