चुनाव से पहले ज्वाइनिंग
पूर्व मंत्री एवं बसपा सरकार में नौ-नौ मंत्रालयों का कार्यभार संभालने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी अब साइकिल पर सवार होने जा रहे हैं। दरअसल, कांंग्रेस में उनको काम नहीं मिला। उनका कहना है कि वो काम करने के लिए कांगे्रस में गये थे लेकिन वहां पर उनको कुछ भी काम करने का मौका नहीं मिला। ऊपर से मना कर दिया गया था कि कोई काम नहीं करोगे, किसी मीटिंग में नहीं जाओगे। कई तरह की बातें उन्होंने अपने इंटरव्यू में कही हैं। दरअसल, बसपा छोडऩे के बाद जो सम्मान उनको मिलना चाहिए था वो कांगे्रस में नहीं मिला इसलिए अब वो साइकिल पर सवार होंगे। समाजवादी पार्टी नेे भी इस समय कोई बड़ा मुस्लिम चेहरा उनके पास नहीं है। आजम खान के जेल जाने के बाद समाजवादी पार्टी के पास कद्दावर नेता की कमी हो गई है। क्या नसीमुद्दीन सिद्दीकी किसी बड़े मुस्लिम नेता का विकल्प होंगे ये आने वाला समय ही बताएगा। राजनीति भी अजीब है किसी जमाने में पानी पी-पीकर सपा को कटघरे में खड़ा करने वाले आज पूर्व मंत्री उसी पार्टी का हिस्सा बन सकते हैं। नसीमुद्दीन सिद्दीकी मुस्लिमों के साथ दलित समाज में भी अपनी एक मजबूत पकड़ रखते हैं। इसका लाभ जरूर समाजवादी पार्टी को आने वाले चुनाव में मिल सकता है। अब ये देखना होगा कि समाजवादी पार्टी उन्हें किस तरह की जिम्मेदारी देती है। उन्हें किस मुस्लिम नेता का विकल्प मानती है। आज समाजवादी पार्टी के पास कई मुस्लिम नेता हैं लेकिन वो आजम खान का विकल्प नहीं बन पाये। क्योंकि आजम खान समाजवादी पार्टी के एक संस्थापक सदस्य हैं और उनका कद पार्टी में मुलायम सिंह के बाद माना जाता है। लेकिन बीच के दिनों में जिस तरह की घटनाएं हुई उससे सपा प्रमुख अखिलेश यादव की कुछ नाराज नजर आ रहे हैं। आजम खान के परिवार ने सीधे तौर पर तो नहीं इनडायरेक्ट तौर पर अखिलेश यादव पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया था। दरअसल, आजम खान और मुलायम सिंह यादव के बीच एक बहुत अजीब रिश्ता था । आजम खान खुद कहते थे कि आशिक और माशूक का रिश्ता है। यही कारण है कि मुलायम सिंह जब तक रहे आजम खान का पार्टी में कद बराबर कायम रहा। लेकिन अब नई पीढ़ी के जमाने में तस्वीरें बहुत बदल गई हैं। पहले मुलायम सिंह के जमाने में किसी भी मुस्लिम नेता की ज्वाइनिंग आजम खान की मर्जी के बिना नहीं होती थी। इतना ही नहीं किसी भी मुस्लिम नेता को आजम खान की इजाजत के बगैर मंत्री नहीं बनाया जाता था। अब तस्वीर बदल रही है अब देखना होगा कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी पार्टी में किसका विकल्प होंगे। जय हिन्द