पीएम मोदी को खतरा
संसद भवन में जो कुछ हो रहा है ऐसा पहले कभी नहीं हुआ। हंगामे होते थे, नारेबाजी होती थी लेकिन उसकी भी एक गरिमा होती थी। प्रधानमंत्री कभी सीधे तौर पर निशानेे पर नहीं होते थे। विपक्ष के नेता घुमा-फिराकर बात करते थे। हालांकि लगातार कांगे्रस की सरकार रही और आज जो लोग सत्ता में हैं यही विपक्ष में थे लेकिन फिर भी संसद में एक गरिमा होती थी। सडक़ों पर जरूर सरकार की आलोचना होती थी। चार सौ रुपए का सिलेंडर होने पर भाजपा की नेता स्मृति ईरानी ने जरूर सडक़ पर उतरकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चूडिय़ां भेंट करने की बात कही थी। इसे भाजपा के कुछ नेताओं ने सही नहीं माना था। हालांकि आज वही स्मृति ईरानी सत्ता में हैैं तो 11 सौ रुपए का सिलेंडर होने पर भी खामोश रहीं। जाहिर है विपक्ष की राजनीति और होती है सत्ता की अलग होती है। लेकिन आज जो कुछ संसद में हो रहा है वो ठीक नहीं है। नेता प्रतिपक्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगातार हमलावर हैं। वो कहते हैं कि प्रधानमंत्री डर गये, वो कहते हैं प्रधानमंत्री की आंखों में उन्होंने डर देखा, भारत मां को बेच दिया, इस तरह की बातें संसद में चल रही है लेकिन सबसे गंभीर बात जो सामने आयी है जिसे किसी मीडिया ने हाईलाइट नहीं किया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि उनको इनपुट था की कांगे्रस की महिला सांसद सदन में प्रधानमंत्री पर हमला कर सकती हैं। इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को संसद में आने से रोका। ऐसा लोकसभा के इतिहास में पहली बार हुआ कि जब राष्टï्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर प्रधानमंत्री ने भाग नहीं लिया। आखिरकार ये इनपुट कहां से आया, इसकी जांच होना चाहिए। किस तरह का हमला था इसकी भी जांच होनी चाहिए। यदि केवल ये एक संभावना थी तो गलत थी। संभावना भी कैसे महसूस हुई, ये भी जांच का विषय है। महिलाओं की बात करने वाली भाजपा इस पर खामोश क्यों है? यदि ये इनपुट सही है तो फिर किस तरह का हमला था ये जांच हो और अगर कुछ नहीं था तो फिर ये महिलाओं का अपमान भी है। इस तरह से महिलाओं को हिंसक बताया गया। बहरहाल, लोकसभा में जो कुछ हो रहा है इसकी उम्मीद नहीं थी। स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आना भी कहीं ना कहीं इस बात का संकेत है कि संवैधानिक पद पर बैठे लोग भी एक तरफा उनका झुकाव लोग महसूस कर रहे हैैं जो लोकतंत्र के लिए अच्छा संकेत नहीं है। जय हिंद