यूपी की राजनीति
शंकराचार्य के शिष्यों की पिटाई करने वाले पुलिसकर्मियों पर आजतक नहीं हुई कोई कार्रवाई
गाजियाबाद (युग करवट)। यूपी की सियासत में रोज नई-नई तस्वीरें सामने आती हैं। जब कोई मुद्दा होता है तो एक-एक साल पुरानी वीडियो भी वायरल हो जाती हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या के बीच जो छत्तीस का आंकड़ा है वो लगातार जारी है।
उप मुख्यमंत्री लगातार अपने स्टैंड पर कायम रहते हैं। अब उन्हें प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी का भी अंदरखाने सपोर्ट मिल गया है। प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों पर लाठीचार्ज करने वाले किसी भी अधिकारी पर कार्रवाई नहीं हुई है। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या पूरी तरह से स्टैंड लिये हुए हैं। वो डीएम प्रयागराज से भी नाराज हैं। अभी हाल ही में जब केशव मौर्या प्रयागराज गये थे तो उन्होंने डीएम मनीष वर्मा से कहा था कि काम कीजिए सतवा बाबा के आश्रम में रोटी ना सेकें। दरअसल डीएम मनीष वर्मा ने सतवा बाबा के आश्रम में पहुंचकर रोटी सेंकी थी जिसका वीडियो वायरल हुआ। सतवा बाबा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के काफी निकट माने जाते हैं। इसलिए केशव प्रसाद मौर्या की चेतावनी के बाद भी डीएम लगातार सतवा बाबा की सेवा में हैं। वहीं एक ऐसी वीडियो वायरल हो रही है जो एक साल पुरानी बताई जा रही है। जिसमें महोबा में प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह का घेराव करने वाले और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के घेराव की चेतावनी देने वाले विधायक बृजभूषण राजपूत के कांधे पर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्या का हाथ है। अब बताया जा रहा है कि ये सबकुछ कहीं ना कहीं एक बड़ी साजिश के तहत घेराव किया गया है। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने भी एक ट्वीट के माध्यम से योगी आदित्यनाथ पर इनडायरेक्ट में वार किया है।
दरअसल घूसखोर पंडत फिल्म को लेकर यूपी में मुकदमा दर्ज कराया गया था और प्रेस नोट में बताया गया था कि ये मुकदमा मुख्यमंत्री के निर्देश पर हुआ है और इसके बाद फिल्म का प्रोमो रोका गया, लेकिन प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने साफतौर पर लिखा है कि उनके कहने पर केंद्र सरकार द्वारा इस मामले में कार्रवाई की गई और ब्राह्मïण समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले घूसखोर पंडत फिल्म के प्रोमो को हटाया गया। जाहिर है प्रदेश अध्यक्ष ने कहीं भी इसमें योगी सरकार को कोई जिक्र नहीं किया और ना ही उनके द्वारा लिखाये गये मुकदमे का कोई उल्लेख किया गया है। बहरहाल उत्तर प्रदेश की सियासत में इस समय बहुत कुछ उलट-पुलट चल रहा है। चुनावी साल है और चुनावी साल में छोटे-छोटे मुद्दे भी बड़े बन जाते हैं। प्रयासगराज में शंकराचार्य के शिष्यों पर जिस तरह पुलिस ने कार्रवाई की और एक भी सिपाही के खिलाफ अभीतक कोई कार्रवाई ना होना लोगों में चर्चा का विषय बना हुआ है।