इस्लाम कहता है मां के कदमों में जन्नत है
वंदे मातरम का विरोध, मातृ भूमि का अपमान
सनातन को तोडऩे की साजिश हो रही है
यूजीसी को बताया बांटने वाला कानून
आशित चंद्रमुनी त्यागी
गाजियाबाद (युग करवट)। श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम का कहना है कि भारत के मुस्लिमों को खुद को बाबर से नहीं जोडऩा चाहिए। बाबर एक लुटेरा भर था। उन्होंने वर्तमान के ज्वलंत मुद्दों पर खुल कर अपनी राय रखी। जाति के आधार पर समाज के बंटवारे की बात पर आचार्य ने कहा कि जाति की लड़ाई राजनीति स्वार्थ के कारण है। जहां तक धर्म की बात है तो धर्म का सवाल सनातन से संबंधित है, सत्य के ऊपर आधारित है।
जहां सत्य है वही शास्वत है और वही सनातन है। कुछ लोग हैं जो सनातन को खंड-खंड करना चाहते हैं। भारत पर आठ सौ साल तक मुगलों ने और दो सौ साल तक अंग्रेजों ने शासन किया।भारत इसलिए गुलाम नहीं रहा कि तैमूर लंग, बाबर, चंगेज खां, औरंगजेब या अकबर बहुत बहादुर लोग थे। भारत इसलिए गुलाम रहा कि हमारे यहां कुछ गद्दार मौजूद थे। जो गद्दार थे वो जन्म से हिन्दू ही थे। सनातन के खिलाफ हजारों साल से एक साजिश चल रही है। यह सनातन की विराटता और विशालता है कि वह नहीं बंटा, अन्यथा तो सनातन को मिटाने की कदम कदम पर साजिश हुई। प्रयागराज में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ हुई घटना पर उन्होंने कहा कि कंधा स्वामी का है मगर निशाना सनातन है। सीएम योगी अविमुक्तेवरानंद का सम्मान करते हैं, यदि ऐसा ना होता तो अब तक बुलडोजर चल गया होता। कुछ राजनीतिक दल मानकर चल रहे हैं कि जब तक हिन्दू नहीं बंटेगा तब तक 2027 का चुनाव नहीं जीता सकता, इसके लिए चक्रव्यूह रचा जा रहा है। कांग्रेस को लेकर उन्होंने कहा कि जबसे कांग्रेस की बागडोर राहुल गांधी के हाथ में आई है तब से कांग्रेस समाप्ति की ओर है। यूजीसी पर आचार्य ने कहा कि जो कानून समाज को विभाजित करता हो उसे नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह विभाजित करने वाले किसी कानून का समर्थन नहीं करते। पीएम मोदी के नेतृत्व में किसी ऐसे कानून का बनना जो समाज को बांटता हो वह संभव नहीं है। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि आज सुभाष चंद्र बोस, सरदार भगत सिंह, चंद्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला खां समेत तमाम शहीदों की आत्मा रो रही होगी। 23 साल के भगत सिंह ने हंसते हंसते फांसी का फंदा लिया तो क्या उन्होंने सोचा होगा कि यह देश केवल सिखों का होना चाहिए। सुभाष चंद्र बोस ने जब नारा दिया कि तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा तब क्या उन्होंने सोचा होगा कि यह देश सिर्फ बंगालियों का होना चाहिए। चंद्रशेखर आजाद ने जब अपनी आखिरी गोली अपनी कनपटी पर मारी होगी तब क्या उन्होंने सोचा होगा कि यह देश केवल ब्राह्मïणों का होना चाहिए। तो उन सभी शहीदों और क्रांतिकारियों की आत्मा तड़प रही होगी कि हम जा कहां रहे हैं। क्या ऐसा भारत बनाना चाहते थे जहां लोग जातियों में बंटे रहे, जहां अगड़े पिछड़ों में बंट जाएं। जब मैं कांग्रेस में था तब भी कहता था कि भाजपा से लड़ो भारत से मत लड़ो। राम और राष्टï्र से मत लड़ो। मैंने कांग्रेस से कहा था कि राम का विरोध मत करो मगर उनकी समझ में आया नहीं। राहुल गांधी एक अजीब किसम की कोठरी से घिरे थे। जहां भारत तेरे टुकड़े होंगे इंश अल्लाह जैसी बाते कही जाती थीं। भारत के टुकड़े करने में इस्लाम का हवाला दे रहे हो। इस्लाम कहता है कि वतन से मुहब्बत तुम्हारे ईमान की अलामत है। इस्लाम कहता है कि जिस मुल्क में रहो उसकी इज्जत करो। इस्लाम कहता है कि मां के कदमों में जन्नत है। जो इस्लाम मां कदमों में जन्नत कहता है वो इस्लाम मादर-ए-वतन की तौहीन की इजाजत कैसे दे सकता है। आप कहते हो वंदे मातरम नहीं बोलेंगे, क्यों नहीं बोलेंगे,इसका मतलब आप मातृ भूमि का सम्मान नहीं कर रहे। अगर आप मातृ भूमि का सम्मान नहीं करते तो आप इस्लाम को नहीं मान रहे। जितने भी लुटेरे आए, बाबर, चंगेज, औरंगजेब आदि से भारत के मुसलमानों को जोड़ कर देखा जाए तो यह गलत होगा। आचार्य ने भारत के सभी मुसलमानों से कहा है कि वो भारत में पैदा हुए हैं, इसी मिट्टी में मिलेंगे। वो अपने आपको मुगलो से ना जोडं़े, वो अपने आपको बाबर से जोड़ें। क्योंकि बाबर एक लुटेरा था। ममता बनर्जी को लेकर उन्होंने कहा कि ममता देश को तोडक़र बंगाल को बंग्लादेश बनाना चाहती हैं। वह जब से सीएम बनी हैं सत्ता के चक्रव्यूह से बाहर निकल ही नहीं पाई हैं। 25 घंटे केवल सियासत करतीं हैं। मोदी-शाह पर आरोप लगाना चाहती हैं। यह लोग भाजपा को कोसते-कोसते भारत को कोसना शुरू कर देते हैं। सत्ता बहुत छोटी है और भारत बहुत बड़ा है। अगर भारत ही नहीं रहेगा तो कहां सियासत करोगे? भारत तब तक सुरक्षित है जब तक सनातन है। यदि सनातन नहीं है तो भारत भी नहीं होगा।
15 साल बाद एक मंच पर आए आचार्य प्रमोद कृष्णम और बाबा रामदेव
हरिद्वार (युग करवट)। लगभग 15 साल बाद श्री कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम एवं बाबा रामदेव एक साथ एक ही मंच प र नजर आए। केन्द्र यूपीए सरकार के समय दिल्ली के रामलीला मैदान में हुई घटना के बाद से दोनों संतों में अलगाव चल रहा था। वर्ष 2011 के जून में बाबा रामदेव द्वारा दिल्ली रामलीला मैदान में आंदोलन किया गया था। दिल्ली पुलि की कार्रवाई के दौरा रामदेव को वहां से भागना पड़ा था। तब आचार्य प्रमोद कृष्णम कांग्रेस के साथ थे। इसी वजह से बाबा रामदेव व आचार्य प्रमोद कृष्णम के बीच तनाव बन गया था। अब हरिद्वार के भारत मंदिर में जूना पीठाधीश्वर स्वामी अवधेशानंद के एक कार्यकम में दोनों संतो का आमना सामना हुआ। दोनों ने मंच साझा किया। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने उन्हें श्री कल्कि धाम आने का न्यौता दिया।