शिक्षक लगे बीएलओ और बोर्ड परीक्षा डयूटी में
नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। परिषदीय विद्यालय के छात्रों को बेहतर शिक्षा करने का दावा कागजों पर जरूर बेहतर दिख रहा है लेकिन हकीकत इससे कहीं कोसो दूर है। वर्तमान में शहरी के सैंकड़ों प्राथमिक विद्यालयों यह स्थिति है कि उन्हें सिर्फ मिड डे बांटने के लिए ही खोला जा रहा है। उसमें भी दूसरे स्कूल के शिक्षक आकर मिड डे मील बंटवाते हैं और फिर स्कूल बंद कर अपने दूसरे स्कूल चले जाते हैं। ऐसा नहीं है कि इस स्थिति के बाद में अधिकारियों को जानकारी नहीं है, लेकिन अधिकारी भी इस मामले में चुप्पी साधे बैठे हुए हैं।
दरअसल प्राथमिक विद्यालयों के अधिकतर शिक्षक बीएलओ डयूटी में लगे हुए हैं। इसके अलावा एक हजार के करीब शिक्षक यूपी बोर्ड परीक्षा में भी डयूटी कर रहे हैं। इसका सीधा असर प्राथमिक स्कूलों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक शहरी क्षेत्र में 50 से अधिक ऐसे स्कूल हैं, जहां वर्तमान में एक भी शिक्षक नहीं है। ऐसे में इन स्कूलों को खोलने के लिए, उन स्कूलों से शिक्षक या शिक्षामित्र बुलाए जा रहे हैं, जहां एक से अधिक संख्या है। यह शिक्षक भी बच्चों को पढ़ाने नहीं बल्कि, सिर्फ स्कूल खोलकर मिड डे मील बांटने आते हैं। इस तरह से स्कूल में बच्चे आते हैं और फाइलों में स्कूल को खुला दर्ज कर दिया जाता है। इसका सीधा प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। अप्रैल से अधिकतर स्कूलों में नया सत्र शुरू कर दिया जाएगा। स्कूलों में बच्चों को कॉपी, किताबें, बैग, जूते, वर्दी आदि का भी वितरण होगा। जब पुराने सत्र में ही बच्चों की पढ़ाई ठप है तो नए सत्र में नई कक्षा में छात्र क्या शिक्षा लेंगे। इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। इसको बेसिक शिक्षक अधिकारी ओपी यादव का दावा है कि स्कूल पूरी तरह से बंद नहीं है। यह जरूर है कि स्कूलों में शिक्षकों की बेहद कमी है, लेकिन जिन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या अधिक है, वहां से शिक्षक दूसरी जगह भेजे गए हैं। ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। साथ ही इसकी मॉनीटिरिंग भी की जा रही है ताकि यह देखा जा सके कि शिक्षक स्कूल पहुंच रहे हैं या नहीं। एसआईआर अभियान में बड़ी संख्या में शिक्षकों की तैनाती की गई है।