पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान का बयान अपने आप में बड़ा संदेश
गाजियाबाद (युग करवट)। विधानसभा चुनाव २०२७ को लेकर प्रदेश में राजनीति गरमाने लगी है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की १२६ से लेकर १४० ऐसी विधानसभा हैं जहां पर जाट समाज निर्णायक भूमिका में हैं और यही कारण है कि लोकसभा के चुनाव २०१४ और २०१९ में भाजपा को मजबूत प्रचंड बहुमत मिला।
विधानसभा चुनाव २०१७ में भी जाट समाज भाजपा की तरफ था, उसका परिणाम रहा कि भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ यूपी में वापस लौटी। लेकिन समय बदलता रहा और फिर जाट समाज को भाजपा हल्के में लेने लगी। यही कारण है कि २०२२ के विधानसभा चुनाव में भाजपा की सीटें पहले जैसी नहीं आयी और २०२४ के लोकसभा चुनाव में जो स्थिति भाजपा की रही वो सभी के सामने है। अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट समाज जिस तरह अन्य चुनाव में भाजपा के साथ था वो दिखाई नहीं दे रहा है और इसका परिणाम अभी हाल ही में मेरठ के सकौती टांडा में जो जाट संसद हुई इसमें दिखाई दी। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का नाम लिये बिना बहुत कुछ संदेश दे दिया। उन्होंने कहा कि अपमान का बदला सूद सहित लिया जाएगा। सांसद बेनिवाल ने तो इससे भी आगे कहा। उन्होंने कहा कि पुलिस ने जाट शब्द हटा दिया। अगर यही हाल रहा तो योगी को भी हटा देंगे। बहरहाल, सकौती टांडा से संदेश निकला है वो अपने आप में बड़ा संकेत है। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री भगवत मान के कारण वो झुक गये वरना प्रशासन की ईंट से र्इंट बजा देते।
जाट संसद में पहुंची भीड़ इस बात का संकेत है कि इस समय भाजपा से कितनी नाराजगी है और ये आने वाले समय में कोई बड़ा फैसला ले सकती है। भाजपा हाईकमान अभी तक इसको गंभीरता से नहीं ले रही है। हालांकि अंदरखाने खबर है कि योगी मंत्रिमंडल के विस्तार में पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ दिलाई जा सकती है। वैसे अब इतनी देर हो गई है कि शपथ लेने के बाद भी कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा। क्योंकि आठ माह बाद यूपी में चुनाव है। वहीं गुर्जर समाज की बात करें तो गुर्जर समाज भी सरकार में और संगठन में अहम भागीदारी नहीं मिलने से नाराज है। 29 मार्च को हुई दादरी में रैली और उसमें उमड़ी भीड़ अपने आप में एक आईना है। बहरहाल, यूपी में चुनावी तैयारियां शुरू हो गई है। कांगे्रस को छोडक़र सभी अपनी-अपनी तैयारियों में लग गये हैं। यूपी में भाजपा और सपा के बीच कड़े मुकाबले की संभावना है।