गाजियाबाद (युग करवट)। हर बार की इस वर्ष भी लैंडक्राफ्ट सोसायटी विभिन्न प्रजाति व रंग-बिरंगे फूलों से सज गई है। संतरंगी फूलों से सजे लैंडकाफ्ट में इसी के साथ ही हॉर्टिकच्लर एंड फ्लोरिकल्चर सोसायटीज व लैंडकाफ्ट डवलपर्स द्वारा तीन दिवसीय फ्लावर शो व चटकारे का आयोजन शुरू हो गया है। इस बार भी मेडिसनल से लेकर सजावटी फूल, बॉलकनी को खूबसुरत बनाने वाले प्लांट, बोनसाईं, आध्यत्मिक महत्व वाले पौधे लोगों के आर्कषण का केन्द्र बने हुए हैं। इसके अलावा खरीददारी के लिए विशेष स्टॉल और चटकारे का स्वाद भी लोगों को अपनी ओर लुभा रहा है। फूलों व प्लांट की प्रदर्शनी में इम्यूनिटी बूस्टर प्लांट, ऑक्सीजन प्लांट, हैगिंग गार्डन, अर्बन माइनिंग, टेरेस गार्डन, हाड्रोपोनिक,सेक्यूलेंट, स्वदेशी फूल, आर्गेनिक सब्जियों का प्रदर्शन किया गया है। हजारों की संख्या में इस बार फूलों की प्रजातियां हैं जिसमें प्यूटिनिया, गेंदे, गुलाब, पैंसी, लिसिथम, ऑर्किड जैसी प्रजाति प्रमुख हैं। प्रवेशद्वार पर धनुष से बनाया गया है तो प्रवेश करने के बाद सामने हाथ में शिव का डमरू लोगों को आर्कषित कर रहा है। फूड सेशन में विभिन्न प्रकार के फूडस भी लोगों को लुभा रहे हैं। इसमें फत्ते की चाट, दिल्ली वालों की चाट, साउथ से लेकर नार्थ इंडियन फूड लोगों को खासे पंसद आएंगे।

खतपतवार भी है जीवन उपयोगी:अर्चना
गाजियाबाद (युग करवट)। लैंडक्राफ्ट द्वारा आयोजित फ्लावर शो में इस बार विशेष तौर पर ऐसे मेडिसनल प्लांट रखे गए हैं जिसे आमतौर पर लोग गमलों या क्यारी में खतपतवार समझ कर फैंक देते हैं, जबकि यह खतपतवार कई रोगों में काम आती है तो वहीं कई बीमारियों को दूर कर सकती है। इसमें गंध प्रसारण, दंती,सिंह पर्णी,विधारपित, भटकुइयां,बिच्छु बूटी आदि विशेष है। इसके अलावा सिंदूर, पत्थर चटा, वैजयंती, अमरूद, सेब आदि प्रमुख है। इन पौधों की विशेषज्ञ अर्चना ने बताया कि हम लोग अपने आप उगने वाले पौधों को उखाड़ देते हैं जबकि इनमें से कई पौधे सब्जियों की तरह काम आते हैं तो कई मेडिसन के रूप में उपयोग में लाए जाते हैं। विधारपित जिसे एलीफेंट क्रीपर भी कहते हैं, यह प्लांट मांस जोडऩे में बेहद उपयोगी माना जाता है। भटकुइंया को लीवर और पेट के लिए लाभकारी माना जाता है। इनका सही और विशेषज्ञ से जानकारी लेकर उपयोग बेहद फायदेमंद होता है। इसके अलावा मेडिसलन प्लांट में गिलोय, एलोवेरा, मेथी, पुदीना, चेंटी पत्ता, धनिया, पान, तुलसी, अजवायन,करीपत्ता, नीम,सदाबहार, हरश्रंगार, जामुन, लेमन ग्रास, अमलतास, सहजन, आंवला, बेल पत्थर आदि प्रमुख तौर पर मौजूद हैं। मेडिसलन प्लांट को उगाना आसान है।

टेराप्लांटर, कम देखभाल में बेहतर खिलते हैं पौधे:कृष्ण गर्ग
गाजियाबाद (युग करवट)। प्रदर्शनी में इस बार टेराप्लांटर खासतौर पर रखे गए हैं। एक मिट्टी के मटके में पानी भरकर उसकी बाहरी परत पर मिट्टी का लेप लगाकर उस पर पौधे लगाए जाते हैं जो दिखने में बेहद खूबसूरत लगते हैं। टेराप्लांटर लगाने वाले पर्यावरण विद् कृष्ण गर्ग ने बताया कि किसी भी मिट्टी के सामान्य घड़े में पानी भरकर उसके बाहरी परत पर आसानी से प्लांट लगाए जा सकते हैं। इस तरह से जहां मटके बेहतर उपयोग होता है वहीं कम देखभाल में पौधे अच्छी ग्रोथ करते हैं। इस तरह से टमनडरा इंडोनेशिया तकनीक है जिसमें पौधों की जड़ों को मिट्टी या जूड आदि में लपेट कर उसे लगाते हैं, इसे किसी गमले की जरूरत नहीं होती है और यह आसानी से हैगिंग हो जाता है। कोकोडरा तकनीकी जापान की तकनीक है जिसमें सिंगल पॉट में इस तकनीक से पौधे उगाएं जाते हैं।
इसके अलावा टेरोरियम प्लांट ओपन और क्लोज बेस पर लगाए जाते हैं। इसमें भी बेहद कम देखभाल में पौधे आसानी से उग जाते हैं।

हाइड्रोपोनिक और वार्टिकल गार्डन बनाते हैं बालकनी को खूबसूरत
गाजियाबाद (युग करवट)। शहरी क्षेत्रों में घरों में अधिक जगह नहीं होती, ऐसे में लोग अपने मनपसंद गार्डन को नहीं लगा पाते। लेकिन हाड्रोपोनिक व वार्टिकल गार्डन ऐसी तकनीक है जो कम जगह में आपको बेहतर गार्डन का लुक दे सकते हैं। इसके हाइड्रोपोनिक में महज पानी और कोकोपीट से विभिन्न प्रजाति के फूल उगाए जा सकते हैं तो वहीं वार्टिकल गार्डन में एक पीवीसी पाइप में एक साथ कई पौधे लगाए जा सकते हैं, इन्हें भी अधिक देखभाल की जररूत नहीं होती।
यहां ट्रे में उगता है जंगल
गाजियाबाद (युग करवट)। छोटी से ट्रे या टब में छोटे-छोटे पौधे लगाकर उसमें एक छोटा जंगल तैयार किया जा सकता है। आप अपने डिजाइन के हिसाब से विभिन्न प्रजातियों के छोटे प्लांट लगाकर ट्रे में अपना गार्डन तैयार कर सकते हैं। इतना ही नहीं इसमें जानवरों की प्रतिकृति, हट आदि लगा सकते हैं। यह देखने में जहां सुंदर लगते हैं तो वहीं इन्हें बनाने में भी अधिक मेहनत नहीं करनी पड़ती। कुछ सामानों से ही इसे तैयार किया जा सकता है।
एक बार फिर आए हैं बोनसाई के 60 पेड़
गाजियाबाद (युग करवट)। गत दो साल से फ्लावर शो में बोनसाई पेड़ो को लाने वाले पूर्व एसआई व पर्यावरणविद् जयपाल सिंह इस बार भी 60 बोनसाई पेड़ो को लेकर आए हैं। उनके बोनसाईं फ्लावर शो में आर्कषण का केन्द्र बने हुए हैं। बच्चे ही नहीं बड़े भी इन बोनसाई पेड़ों को देखने के लिए उत्साहित दिखे।
यपाल सिंह ने बताया कि पिछले 41 साल से वह बोनसाईं प्लांट तैयार कर रहे हैं। यह उनका पैंशन हैं जिसे उन्होंने दिल्ली पुलिस सेवा में रहते हुए बरकरार रखा और अब रिटायर्ड होने के बाद वह फुल टाइम अपने पैंशन से जुड़े हैं। जयपाल सिंह ने उनके पास 80 साल पुराना सैलुलेण्डस का पेड़ है जिसे तुफान का रूख बदलने वाला कहा जाता है। यानि यह प्लांट तुफान के रूख के साथ अपना रूख बदल लेता है। इस अवसर पर वह 60 प्रजातियों के बोनसाईं प्लांट लेकर आए हैं। जिसमें 65 साल पुराना खिरनी का पेड़, 65 साल पुरान अपराइट बोनसाई पेड़, 55 साल का फारपाल अपराइट, सेलेटिंग बोनसाई के पेड़ हैं। 55 साल पुराना पीपल का पेड़ आदि मौजूद है।
डमरू और शिवलिंग बना आकर्षण का केन्द्र
गाजियाबाद (युग करवट)। फ्लावर शो में फूलों में इस बार भी विभिन्न आकृतियां बनाई गई हैं, यह आकृतियां फूलों से सजाई गई हैं। जिसमें मुख्य प्रवेश द्वार पर ही फूलों से शिवलिंग बनाया गया है। वहीं हाथ में डमरू भी लोगों को आध्यत्मिक आभास दे रहा है। इसके अलावा फूलों से अमृत कलश, सितार, पौधे को पानी देने का जार, फूलों से बनी तितली, खराब टायर में सजे फूल, फूलों से बने पक्षी, बांस की टोकरी के साथ फूलों का झरना दर्शकों के लिए आर्कषण का केन्द्र बना हुआ है। दर्शक इन आकृतियों के पास फोटो व सेल्फी लेने के उत्साहित दिख रहे हैं। फूलों से गणेश जी की आकृति, अमृत कलश, नाग, मोर, टोकरियों में फूलों का झरना, मछली का मॉडल तैयार किया गया है। इसके अलावा शंख के साथ मुख्य प्रवेशद्वार पर सुदर्शन चक्र की आकृति बनाई गई है। जहां दर्शक पहुंचकर खूब सेल्फी और फोटो सेशन करा रहे हैं। इसके अलावा विशेष वाटिका बनाई गई है जिसमें वंदे मातरम गीत के 150 वर्षो को सेलीब्रेट करते हुए,रविन्द्र नाथ टेगौर की तस्वीर व वाटिका का निर्माण किया गया है।