नोएडा में एक युवा जो पेशे से इंजीनियर था उसकी बड़ी दर्दनाक मौत हुई। क्या पाठकों को उस युवराज मेहता की कुछ याद है? या सरकार और सिस्टम की तरह आप भी उन्हें भूल चुके हैं। सही मायने में उस युवा इंजीनियर युवराज मेहता की मौत कोई हादसा नहीं था, बल्कि सिस्टम द्वारा की गई हत्या थी। मगर कानून की नजर से उसे हादसा या दुर्घटना ही कहा जाएगा। यह दु:खद घटना 17 जनवरी की देर रात को हुई थी। घटना पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल संज्ञान लेकर एसआईटी का गठन कर दिया था। एसआईटी ने अधिकारियों से रिपोर्ट ली, गवाहों के बयान हुए। पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया, कुछ लोगों की गिरफ्तारियां भी हुई थी। यहां तक तो सब ठीक ही लग रहा था। मगर जब बात एसआईटी की देखी जाती है तो बड़ी हैरानी होती है। तकरीबन दो महीने बीत जाने के बाद भी एसआईटी की रिपोर्ट का कुछ अता-पता नहीं है। एसआईटी की फाइल किस टेबल पर रुक गई या किस स्तर पर ठंडे बस्ते में चली गई पता ही नहीं चल रहा है। हाईकोर्ट में इसी केस को लेकर एक याचिका भी डाली गई थी।
संभव है कि उस पर कोई सुनवाई चल रही हो। मगर मूल सवाल यही है कि जिस केस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुल इंवोल्व थे, जिस केस में मुख्यमंत्री ने तत्काल संज्ञान लेकर एसआईटी का गठन किया उस केस में इतनी हीलाहवाली क्यों हो रही है? यह भी समझ से बाहर है कि आखिरकार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी एसआईटी की रिपोर्ट पर कुछ किया क्यों नहीं। हालांकि इस तरह की घटना का होना हमारे यहां कोई नई बात नहीं है। भरी पार्टी में मॉडल जेसिकालाल की हत्या गोली मारकर की गई थी, मगर केस के अंजाम पर बॉलीवुड को फिल्म बनानी पड़ी थी जिसका टाइटल था नो वन किल्ड जेसिका। अर्थात जेसिका को किसी ने नहीं मारा। तो क्या अब हम यही मान लें युवा इंजीनियर युवराज मेहता की मौत के लिए भी कोई जिम्मेदार नहीं है?