पुरानी कहावत है कि जहां अति है, वहां क्षति अवश्य है। यह भी कहा जाता है कि अति तो हर चीज की बुरी होती है। किस्से, कहानियां, कहावतें हमारे मनोरंजन मात्र का साधन नहीं है। इनमें जीवन के गूढ़ रहस्य छूपे होते हैं। हमारे पूर्वजों ने हमें हर बात के लिए आगाह किया हुआ है। हम उनकी हर बात को जानते भी हैं, लेकिन पता नहीं क्यों उन्हें मानना नहीं चाहते। हममें से शायद ही कोई ऐसा होगा जो यह नहीं स्वीकार करेगा कि कांग्रेस ने इस देश में अति नहीं की थी। जो इस बात को स्वीकार करते हैं वह यह भी जानते हैं कि आज कांग्रेस की हालत क्या है। कल सीएम योगी ने भी सपा को चेताया था कि कांग्रेस की हालत यह है कि विधान परिषद में उसकी एक भी सीट नहीं है, अगर सपा नहीं सुधरी तो उसकी भी यही हालत होगी। सीएम योगी की इस बात को भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व और केन्द्र सरकार को भी समझ लेनी चाहिए। आज यूजीसी जैसे कानून लागू करके भाजपा सरकार अति कर रही है। समाज ने विघटनकारी नीतियों को कभी स्वीकार नहीं किया है। थोड़े समय तक चीजें चलती हैं मगर उसके बाद बदलाव की वह हवा चलती है तो सब कुछ बदल जाता है। सत्ता में रहने वाले लोग सही तरीके से विपक्ष में रहने लायक भी नहीं रह पाते। सवर्ण समाज आज खुद को ठगा सा महसूस कर रहा है। जिस हिन्दुत्व को सीढ़ी बनाकर भाजपा सत्ता तक पहुंची है आज यूजीसी के नाम पर हिन्दू समाज में अलगाव पैदा हो रहा है। अगर हिन्दू ही एकजुट नहीं रहा तो भाजपा कैसे सत्ता में बनी रह सकती है। भाजपा की असली ताकत ही हिन्दुत्व है, सबका विकास-सबका विश्वास तो दूसरी बात है। आने वाले समय में क्षति से बचना है तो अभी से अति को दूर करना होगा। समाज को छोटे, बड़े, दलित, पिछड़े, अति पिछड़े में बांट देने से भला भाजपा का भी नहीं होने वाला। इसलिए भूल सुधार करते हुए अति से वापस लौट जाना ही बेहतर होगा। वरना जो जनता कांग्रेस का विकल्प तलाश चुकी है, वह भाजपा का विकल्प चुनने को भी बाध्य हो सकता है।