यूजीसी के नए कानून से खुद ठगा महसूस कर रहा उत्तर प्रदेश का सवर्ण समाज क्या अब भाजपा का विकल्प तलाशने लगा है? यह सवाल मेरा नहीं हैं बल्कि बड़े पैमाने पर सवर्ण समाज में उठाया जा रहा है। जिस तरह से पहले ब्राह्मïण समाज को टारगेट किया गया, भगवान परशुराम को लेकर बाते कहीं गईं उससे यूपी में ब्राह्मïण समाज अपनी नाराजगी पहले ही जता चुका था। ब्राह्मïण समाज से आने वाले जनप्रतिनिधियों ने बैठक करके भाजपा के शीर्ष नेतृत्व को चिंता में डाल दिया था। उसके बाद यूजीसी कानून के नए प्रारूप को लागू कर दिया गया। यह भी नहीं सोचा गया कि इसके साइड इफ्ेक्ट क्या होंगे। यूजीसी के नए कानून की जानकारी होने के बाद देश भर में इसके खिलाफ आवाज उठी। शहर-शहर आंदोलन किए गए। सवर्ण समाज समझ ही नहीं पा रहा था कि जिस भाजपा के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व दे दिया उसी भाजपा के शासनकाल में उनके बच्चों का भविष्य अंधकारमय कर दिया जाएगा। अब यूजीसी को लेकर समाज दो फाड है। एक पक्ष इसे लागू करने की महिम चला रहा है तो दूसरा इस समाप्त करने की लड़ाई लड़ रहा है। मामला राजनीतिक रूप भी ले चुका है। सवाल उठने लगा है कि क्या सवर्ण समाज अपने उत्पीडऩ से त्रस्त होकर क्या भाजपा का विकल्प तलाशने लगा है? अगर ऐसा है तो यह भी पता चलना चाहिए कि इस स्थिति में उसके पास विकल्प क्या हैं? यूपी में कांग्रेस की झोली में ज्यादा कुछ है नहीं। इसलिए लगता नहीं कि सवर्ण समाज उधर जाने की भी सोचेगा। समाजवादी पार्टी का शासन पहले कई बार देखा जा चुका है। सपा शासन कानून व्यवस्था को लेकर सवाल के घेरे में रहा है। साथ ही सपा शासन में धर्म विशेष को मिलने वाली ताकत भी समाज को चिंता में रखती है। इसके बाद नंबर आता है बसपा का। मायावती की सख्त प्रशासक की छवि किसी से छुपी नहीं है। उनकी कार्य प्रणाली, अधिकारियों में उनका खौफ कोई भूला नहीं है। पिछले दिनों ब्राह्मïण समाज पर समस्या आई तो मायावती ने दिल खोलकर ब्राह्मïण समाज का साथ देने का वायदा कर दिया। उनको अपनी तरफ आने का निमंत्रण भी दिया। अब यूजीसी के नए कानून की बात आई तो मायावती ने सवर्ण समाज की चिंता में भागीदारी की। सुप्रीम कोर्ट द्वारा यूजीसी पर रोक लगाने का स्वागत किया। पहले भी मायावती सोशल इंजिनियरिंग के माध्यम से सत्ता तक पहुंच चुकी हैं। ऐसे में मायावती सवर्ण समाज के लिए बंहतर विकल्प बन सकती हैं। उनका अपना समाज मायावती के साथ रहे और सवर्ण समाज का साथ मिल जाए तो सत्ता तक पहुंचना आसान हो जाएगा।