गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस, यातायात पुलिस चाहे कितने भी दावे कर ले, मगर सच्चाई इससे उलट ही है। ऐसा लगता है कि जैसे पुलिस कमिश्नर ने भी इस सच्चाई की तरफ से आंखे फेर ली हैं। मैं बात कर रहा हूं गाजियाबाद में यातायात व्यवस्था की। ऐसा कौन है जो गाजियाबाद की सडक़ों पर चलता हो और जाम का शिकार ना बनता हो। क्या ऐसा भी कोई व्यक्ति है जो कहेगा कि वह गाजियाबाद की यातायात व्यवस्था से संतुष्टï है? कल ही मामला देख लीजिए राजनगर एक्सटेंशन चौराहे पर भारी जाम के बावजूद यातायात पुलिस ने बेरिकेड नहीं हटाए। अब यह तो यातायात पुलिस के अधिकारी ही बता सकते हैं कि ट्रैफिक पुलिस जाम खुलवाने के लिए है या लगवाने के लिए? इन दिनों शाम के समय आप गाजियाबाद में किधर भी निकल जाइए अगर रास्ते में कोई फार्म हाउस, बैक्वट हॉल पड़ गया तो आपको जाम में फंसना ही फंसना है। बताया गया था कि गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस में फार्म हाउस और बैंक्वेट हॉल संचालकों के साथ बैठक की थी। बैठक में उनसे समारोह के दौरान स्थल के बाहर वाहन नहीं खड़े होने देने की बात कही गई थी। बताया तो यह भी गया था कि किसी भी फार्म हाउस या बैंक्वेट हॉल के बाहर गाड़ी खड़ी मिली और वहां जाम लगा तो पुलिस कार्रवाई करेगी। मगर क्या कहीं भी ऐसा हो रहा है? कोई बिरला ही बैंक्वेट हॉल होगा जिसमें समारोह हो और वहां जाम ना लगता हो। पांडव नगर का तो बहुत ही बुरा हाल है। यहां एक साथ बहुत से बैंक्वेट हॉल हैं, सभी के सामने भारी जाम रहता है। सैंकड़ों वाहन चालक जाम से जूझते हैं, परेशान होते हैं, मगर यातायात पुलिस को कुछ दिखता ही नहीं है।