22 मार्च को दिल्ली के मावलंकर हॉल में जो भी पहुंचा उसको अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हो रहा था। लोग यकीन नहीं कर पा रहे थे कि किसी नेता के व्यक्तिगत बुलावे पर इतने लोग भी एक जगह एकत्र हो सकते हैं। लेकिन यहां बात पूर्व सांसद केसी त्यागी की थी। इस बात को साबित करने की जरूरत नहीं थी, मगर इस कार्यक्रम ने बता दिया कि केसी त्यागी आज भी यूपी, दिल्ली, हरियाणा तक अपना मजबूत वर्चस्च रखते हैं। शायद की कोई जिला ऐसा होगा जहां से लोग मावलंकर हॉल ना पहुंचे हों। हर जाति, हर संप्रदाय, हर वर्ग के लोग वहां पहुंचे थे। इसी तरह उनके पुत्र अमरीश त्यागी ने भी दिखा दिया कि वेस्ट यूपी के युवाओं में उनका क्या स्थान है। अमरीश त्यागी के समकक्ष किसी नेता के पास संभवत: युवाओं की इतनी ताकत नहीं होगी। युवाओं की ऐसी भीड़ किसी जनप्रतिनिधि के पास पद के कारण तो हो सकती है। मगर बिना किसी पद के ऐसा कर पाना बहुत मुश्किल है। खासकर गाजियाबाद में तो संभव ही नहीं है। केसी त्यागी वर्तमान की राजनीति के एकमात्र ऐसे नेता हैं जो आज भी किसान की बात हर मंच पर करते हैं। भारत रत्न चौधरी चरण सिंह की राजनीतिक परंपरा को केसी त्यागी जीवित रखे हुए हैं। आज देश में किसान और कामगार की बात करना बहुत कम नेता पसंद करते हैं। नेताओं का अब कॉरपोरेट की बात करना ही अच्छा लगने लगा है।
अभी कुछ दिन पहले ही युग करवट ने प्रकाशित किया था कि हापुड़ क्षेत्र की मंडी में गोभी दो रुपए किलो बिक रही थी। किसान को इतना पैसा भी नहीं मिल रहा था कि उसकी लागत भी निकल पाती। ऐसे मुद्दों पर बोलने का माद्दा केवल केसी त्यागी में ही रह गया है। देश की राजनीति की बात करें तो अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केसी त्यागी ही उस उसूलों की राजनीति को जीवित रखे हुए हैं। अधिकतर नेताओं के लिए ना जुबान की कोई कीमत रह गई है ना उसूलों की। मगर केसी त्यागी अपने जुबान की कीमत भी बनाए रखे हुए हैं और उसूलों की भी।