नई दिल्ली (युग करवट)। अमेरिकी राष्टï्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि बिना शर्त सरेंडर करने के अलावा ईरान से कोई डील नहीं होगी। ईरान की राजधानी तेहरान पर कई हवाई हमले किए गए।
पिछले ७ दिनों से ये संषर्घ जारी है, और हर रोज बेगुनाह लोग मारे जा रहे हैं। इस बीच युद्ध की आर्थिक चपेट पूरी दुनिया आने वाली है, क्योंकि इस लड़ाई के केंद्र में कच्चा तेल है। अब युद्ध के सातवें दिन कच्चे तेल को लेकर बड़ी चेतावनी सामने आई है. कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी का कहना है कि अगर मिडिल-ईस्ट से एनर्जी सप्लाई बंद हुआ तो यह संकट दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं को हिला सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर युद्ध के कारण तेल निर्यात प्रभावित होता है तो कच्चे तेल की कीमतें अगले २ से ३ हफ्तों में १५० डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब अगर युद्ध तुरंत खत्म भी हो जाता है तो भी उत्पादन और आपूर्ति को सामान्य स्तर पर लाने में कई हफ्तों से महीनों तक का समय लग सकता है। दरअसल, युद्ध की वजह से कतर को अपने बड़े एलएनजी प्लांट में उत्पादन को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा है। इससे वैश्विक गैस आपूर्ति को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। एनालिटिक्स फर्म केप्लर के आंकड़ों के अनुसार, कतर और संयुक्त अरब अमीरात मिलकर पाकिस्तान को आयात का ९९ फीसदी, बांग्लादेश का ७२ और भारत का ५३ प्रतिशत का आपूर्ति जरूरत को पूरा करते हैं। इस बीच शुक्रवार क्रुड में कीमत बढक़र ८६ डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई।
भारत ने दिए एलपीजी प्रोडेक्शन बढ़ाने के निर्देश
नई दिल्ली (युग करवट)। ईरान जंग को देखते हुए भारत सरकार क्रुड ऑयल के इस्तेमाल की प्रायरिटी तय कर रही है। सरकार जंग को देखते हुए ये फिक्स कर रही है कि क्रुड ऑयल का इस्तेमाल कहां और कैसे हो। हालांकि सरकार ने कहा है कि देश के पास हॉरमुज स्ट्रेट में फंसे क्रूड ऑयल से ज्यादा क्रुड ऑयल है। वेस्ट एशिया से सप्लाई में रुकावट के बाद भारत ने ऑयल रिफाइनरीज को लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस प्रोडक्शन ज्यादा से ज्यादा करने का निर्देश दिया है। सरकार ने घरेलू प्रोड्यूसर को उपलब्ध प्रोपेन और ब्यूटेन रिसोर्स का इस्तेमाल करके आउटपुट को प्रायोरिटी देने का आदेश दिया है।