हाउस टैक्स का मामला
हाउस टैक्स को लेकर शहर के साढ़े पांच लाख लोगों पर जो बढ़े हुए टैक्स की मार निगम द्वारा डाली गई है। अब उसकी परतें खुल रही हैं। दरअसल जनप्रतिनिधि इस बढ़ोतरी के लिए निगम के अधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं लेकिन हकीकत ये है कि गंभीरता से किसी ने इस अहम मुद्दे को किसी ने नहीं उठाया। एक टीवी सीरियल आता था कि जिसमें जसपाल भट्टी हर मामले को लेकर बैठक बुलाते थे। हाउस टैक्स को लेकर भी कुछ इसी तरह से जसपाल भट्टी की तरह बैठकें होती रही है लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। २०२४ से हाउस टैक्स बढ़ोतरी का मामला चल रहा है लेकिन किसी ने भी जनहित के इस मुद्दे पर दिलचस्पी नहीं दिखाई। हालांकि निगम के पूर्व पार्षद जरूर इस मामले में सक्रिय हुए और उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जब मामला कोर्ट में चला गया तो फिर महापौर सुनीता दयाल भी सक्रिय हुई और उन्होंने जनता के हितों का ध्यान रखते हुए 30 जून 2025 को बोर्ड बैठक बुलाकर बढ़े हुए प्रस्ताव को रद्द करा दिया। लेकिन यहां भी पार्षदों को बोर्ड की मिनिट्स के लिए बकायदा धरना देना पड़ा ऐसा भी पहली बार हुआ जब पार्षदों को मिनिट्स के लिए धरना देना पड़ा। 2024 से लेकर 2026 तक आखिर ऐसा क्या कारण रहा जिसमें हाउस टैक्स का प्रस्ताव रद्द होने के बाद भी उसे लागू नहीं कराया जा सका। बार-बार एक शासन के पत्र का जिक्र किया जाता है लेकिन शासन ने कोई भी आदेश टैक्स को लेकर नहीं दिया। उत्तर प्रदेश शासन के अनु सचिव द्वारा 6 मार्च 2025 को एक पत्र नगरायुक्त को लिखा गया जिसमें नगरायुक्त के पत्र संख्या 600/न0/२०२४-25 दिनांक 26-12-2024 का जवाब देते हुए पत्र में लिखा है कि नगर निगम गाजियाबाद के सदन द्वारा पारित प्रस्ताव दिनांक 09-10-2024 के क्रम में नगर निगम में श्रेणीवार मोहल्लों की न्यूनतम मासिक किराया दरों को लागू कराये जाने के संबंध में मार्गदर्शन प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया है। पत्र में लिखा है कि उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम १९५९ की धारा १७४ की उपधारा २(ख) के अधीन भवन या भूमि के वार्षिक गणना के लिए प्राविधान है। जिसमें नगरायुक्त द्वारा प्रत्येक दो वर्ष में एक बार भवन या भूमि की अवस्थिति भवन के निर्माण की प्रकृति भारतीय स्टाम्प अधिनियम 1899 के प्रायोजन के लिए कलेक्टर द्वारा निर्धारित सर्किल रेट ऐसे भवन या भूमि के लिए किराये की वर्तमान न्यूतम दरें निर्धारित की जा सकती हैं। पत्र के अंत में लिखा है कि मुझे यह कहने का निर्देश हुआ है कि कृप्या प्रश्नगत प्रकरण में निगम एक्ट के तहत अपने स्तर से ही नियमानुसार कार्यवाही करें। पत्र में कहीं भी हाउस टैक्स बढ़ाने का जिक्र नहीं है फिर आखिरकार जनता पर ये बोझ कैसे डाला गया। केवल बैठकें होती रही और अब भाजपा के नेता भी बयानबाजी कर रहे हैं। लेकिन २०२४ से अब तक जनता के मुद्दे पर क्यों खुलकर भाजपा के नेता जनप्रतिनिधि और पूर्व मेयर जो भी रहे हैं वो क्यों नहीं आये। आज सभी को पीड़ा हो रही है। अब भी गेंद निगम के पाले में हैं। प्रस्ताव जब रद्द हो चुका है तो फिर उसे लागू कराया जाए ताकि जनता को लाभ मिले या फिर बीच कोई रास्ता हो जिससे सांप भी मर जाए और लाठी भी ना टूटे। जय हिंद