संसद में हंगामा
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी सेवानिवृत्त नरवाणे द्वारा लिखी जा रही पुस्तक को लेकर तीन दिन से सदन में हंगामा कर रहे हैं। दरअसल, वो जिस मैग्जीन को दिखा रहे हैं वो मैग्जीन प्रकाशित ही नहीं हुई है। सरकार कहती है कि उसका प्रकाशन रोक दिया गया। सवाल ये भी है कि आखिरकार क्यों रोका गया? अगर सरकार की बात पर भरोसा करें तो फिर एक प्रूफ कॉपी मैग्जीन की राहुल गांधी के पास है। कोई भी किताब या सामग्री छपती है तो उससे पहले उसका प्रूफ पढऩे के लिए निकलता है। हो सकता है वो प्रूफ ही नेता प्रतिपक्ष के हाथ में लग गया। प्रूफ की कोई अहमियत नहीं होती। क्योंकि वो फाइनल नहीं होता है। प्रूफ की कॉपी इसलिए निकाली जाती है ताकि उसमें घटाया या बढ़ाया जा सके, कुछ गलतियां हो तो उसे सही किया जा सकता है। जिस मैग्जीन की बात राहुल गांधी कर रहे हैं जब वो मार्केट में ही नहीं आयी है और सरकार के बकौल छपी ही नहीं है तो फिर उसकी प्रमाणिकता क्या है? लेकिन नेता प्रतिपक्ष में सदन में हंगामा जरूर खड़ा कर दिया। हमेशा शांत रहने वाले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह कल दूसरी बार सदन में गुस्से में देखे गये। जाहिर है राहुल गांधी जो बात उठा रहे थे वो सत्य से परे थी इसी कारण रक्षामंत्री को भी गुस्सा आ गया। वहीं नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी इसमें कोई दोराय नहीं सदन में ऐसे मुद्देे उठाते हैं जो आम आदमी से मतलब नहीं रखते। नेता प्रतिपक्ष का काम सरकार को आईना दिखाना होता है। देश की इस समय क्या स्थिति है उससे अवगत कराना होता है। जो लोग सत्ता में होते हैं उन्हें सब हरा-हरा ही दिखाई देता है लेकिन जो विपक्ष में लोग होते हैं वो जनता से जुड़ जाते हैं और फिर जमीनी हकीकत से रूबरू भी होते हैं। इसलिए विपक्ष की भूमिका बहुत अहमियत रखती है। हालांकि बदलती राजनीतिक तस्वीर में विपक्ष लगातार कमजोर होता जा रहा है या ये कहा जाए कि कमजोर किया जा रहा है तो गलत नहीं होगा। बहरहाल नेता प्रतिपक्ष को चाहिए कि वो जनहित से जुड़े मुद्दे को सदन में उठाये। जय हिंद