शंकराचार्य पर एफआईआर
चुनावी मौसम में उत्तर प्रदेश में भगवा बनाम भगवा को लेेकर जो राजनीति शुरू हुई है उसका आने वाले समय में जरूर असर दिखाई देगा। दरअसल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ दर्ज एफआईआर को लेकर अब पर्दे के पीछे जो रणनीति बनाई गई उसकी परतें आहिस्ता-आहिस्ता खुल रही हैं। दरअसल, शंकराचार्य को फंसाने की जो बिसात बिछाई गई उस बिसात पर जो मोहरे चले जा रहे हैं वो आहिस्ता-आहिस्ता कहीं ना कहीं गिरते नजर आ रहे हैं। हालांकि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पूरे तरीके अब कानूनी तौर पर लड़ाई लडऩे के लिए सक्रिय हो गये हैं। उनके वकील ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए प्रार्थना पत्र भी दे दिया है। वहीं पर्दे के पीछे आशुतोष ब्रह्मïचारी के अलावा कई और लोग भी शामिल हैं ये भी चर्चा चल रही है। दरअसल, पहले एक तहरीर दी गई थी जिसमें आशुतोष ब्रह्मïचारी ने अपने ऊपर धारदार हथियार से हमला करने के आरोप शंकराचार्य एवं उनके शिष्य पर लगाये थे लेकिन पुलिस ने वो तहरीर दर्ज नहीं की। इसके बाद फिर ये कदम उठाया गया। दरअसल, इस सब के पीछे 11 मार्च को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का वो मार्च था जो गोमाता को राष्टï्रीय पशु घोषित करने के लिए वो निकलाने जा रहे थे इसके अलावा मुख्यमंत्री योगी के खिलाफ भी वो बहुत कुछ बोलने वाले थे इसलिए चर्चा है कि आशुतोष ब्रह्मïचारी के द्वारा ये सबकुछ किया गया। शंकराचार्य पर जो आरोप लगे हैं और जिन बच्चों ने आरोप लगाये हैं उन बच्चों का शंकराचार्य से उनके शिष्यों से, उनके विद्यालयों से कोई भी लेना-देना नहीं है। येे आरोप लगाने वाले बच्चे कभी भी शंकराचार्य के किसी भी विद्यालय में नहीं रहे हैं। फिर इनका कैसे यौन शोषण हुआ ये भी बड़ा सवाल है। शंकराचार्य का कहना है कि इसमें कुछ अधिकारी भी शामिल हैं। वहीं अगर शंकराचार्य के खिलाफ थाने में जब पोक्सों के तहत तहरीर दी गई तो फिर मुकदमा दर्ज क्यों नहीं हुआ ये भी सवाल शंकराचार्य उठा रहे हैं। उनका कहना है कि पोक्सों में तो पीडि़त का बयान ही सबकुछ है फिर पुलिस ने क्यों दर्ज नहीं किया। जाहिर है कि पर्दे के पीछे कुछ और ही कहानी है। यहां ये भी उल्लेखनीय है कि माघ मेले में 26 व 27 जनवरी को पुलिस प्रशासन के बड़े अधिकारियों ने शंकराचार्य जी से अनुरोध किया था कि वो स्नान कर लें, उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा और प्रशासन पुष्पवर्षा भी करेगा लेकिन शंकराचार्य तैयार नहीं हुए और उन्होंने कहा कि पहले शिष्यों की शिखाएं खींचने वालों के खिलाफ कार्रवाई हो और लिखित में माफी मांगी जाए। सवाल ये है कि एक तरफ प्रशासन गुहार लगा रहा है, दूसरी तरफ एफआईआर हो रही है आखिरकार पर्दे के पीछे ये सबकुछ कैसे हो रहा है, कौन करा रहा है ये बड़ा सवाल है। जय हिंद