गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम कार्यकारिणी के उपसभापति के अधिकारों को लेकर चर्चा चलती रहती है। पहले मेयर के बाद डिप्टी मेयर लिखा जाता था लेकिन अब डिप्टी मेयर का नाम बदलकर कार्यकारिणी उपसभापति यानि वाइस चेयरमैन कहलाया जाने लगा है। कल युग करवट में इसी कॉलम में कार्यकारिणी उपाध्यक्ष के अधिकार को लेकर खबर छपी थी। इसको लेकर कई लोगों ने अपने पक्ष रखे वहीं कई वरिष्ठ पूर्व पार्षदों ने इस बारे में निगम एक्ट के तहत अहम जानकारियां दीं। निगम एक्ट के तहत मेयर के बाद उपसभापति के अधिकारों का कई जगह जिक्र किया गया है। धारा-५१/२ निगम एक्ट में उपसभापति यानि वाइस चेयरमैन के अधिकारों का जिक्र किया गया है। निगम एक्ट की धारा ८२-८८/२ में कहा गया है कि यदि महापौर कहीं बाहर हैं या वो विदेश चली गई है अथवा लंबी छुट्टी पर हैं तो उपसभापति को अधिकार है वो बोर्ड बैठक बुला सकता है। इतना ही नहीं निगम एक्ट में उपसभापति के अधिकारों का कई जगह उल्लेख किया गया है। इसके अलावा निगम एक्ट में यह भी बताया गया है कि हर दो माह में बोर्ड बैठक बुलाना अनिवार्य है। वहीं एक माह में कार्यकारिणी की बैठक बुलाना अति आवश्यक है। बोर्ड बैठक बुलाने का अधिकार यदि मेयर नहीं है तो उपसभापति भी यदि कोई १/३ पार्षद लिखकर दे दें तो उपसभापति भी अधिवेशन बुला सकता है। पूर्व वरिष्ठ पार्षदों के अनुसार कार्यकारिणी उपसभापति/वाइस चेयरमैन को एक्ट में अधिकार दिया गया है लेकिन ये अधिकार मेयर की गैरमौजूदगी में ही प्रभावी है।
निगम एक्ट के तहत चलता है: प्रवीण चौधरी
गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम कार्यकारिणी के उपसभापति प्रवीण चौधरी ने इस बारे में कहा कि निगम पूरी तरह से निगम एक्ट के तहत ही चलता है और निगम की धारा ११७ में सारे अधिकार बोर्ड और कार्यकारिणी के पास है। जो फैसला बोर्ड और कार्यकारिणी करेगा वही मान्य होता है और उसका पालन ही अधिकारी कराते हैं। बोर्ड और कार्यकारिणी के फैसले सर्वोपरि होते हैं। उन्होंने कहा कि निगम की मुखिया महापौर हैं और हम सब मिलकर उनके साथ काम करते हैं बैठकें करते हैं। भले ही निगम एक्ट में उपसभापति के अधिकारों की व्याख्या की गई है लेकिन मेयर सर्वोपरि हैं, वही सदन की नेता हैं और वही सभी पार्षदों की मुखिया हैं। उन्होंने कहा कि अधिकारों को लेकर कोई भी मनमुटाव नहीं है हम सब महापौर के साथ मिलकर शहर में किस तरह विकास हो इसको लेकर मंथन करते रहते हैं।