नई दिल्ली (युग करवट)। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी संघीय व्यापार अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए नए वैश्विक आयात शुल्क को खारिज कर दिया है। अदालत ने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत मिली सीमित शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया और कानून से बाहर जाकर 10 प्रतिशत आयात अधिभार लगाने की कोशिश की।
अमेरिकी कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड ने 2-1 के फैसले में कहा कि ट्रंप प्रशासन 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 122 का इस्तेमाल व्यापक व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे के आधार पर नहीं कर सकता। अदालत के मुताबिक, यह कानून 1970 के दशक की विशेष बैलेंस ऑफ पेमेंट्स यानी भुगतान संतुलन संकट से निपटने के लिए बनाया गया था, न कि आधुनिक दौर के सामान्य व्यापार घाटे के लिए। जज मार्क ए. बार्नेट और क्लेयर आर. केली ने अपने फैसले में कहा कि ट्रंप की घोषणा यह साबित करने में विफल रही कि कानून के जरिए आवश्यक शर्तें पूरी हुई हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में ये टैरिफ लगाए थे।
अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि अगर राष्ट्रपति को इतनी व्यापक व्याख्या की अनुमति दे दी जाए, तो उन्हें लगभग असीमित टैरिफ लगाने की शक्ति मिल जाएगी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा करना संवैधानिक सवाल खड़ा कर सकता है, क्योंकि टैरिफ और व्यापार नीति तय करने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस के पास है। अब इस फैसले को अमेरिकी कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट में चुनौती दिए जाने की संभावना है और मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच सकता है।