ये क्या हो रहा है
उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक ऐसा राजनीतिक चेहरा है जो भाजपा के लिए संकट मोचन की तरह हमेशा तैयार रहता है। २०१७ के बाद कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद अगर जनसभाओं की किसी की सबसे ज्यादा डिमांड रही तो यूपी के मुख्यमंत्री की रही। कई राज्यों में चुनाव के दौरान उन्हें बुलडोजर भी भेंट किये गये और मंचों से बुलडोजर बाबा भी कहा गया। कई राज्यों में योगी आदित्यनाथ की वजह से भाजपा की सीटें भी आयीं। किसी और राज्य के मुख्यमंत्री की इतनी डिमांड चुनाव में नहीं रही। लेकिन असम केरल तमिलनाडू और असम में योगी आदित्यनाथ की सभाएं नहीं हुई। भले ही वो स्टार प्रचारक रहे लेेकिन उनकी कहीं भी चुनावी सभाएं इतनी नहीं कराई गई जितनी २०२१ के चुनाव में इन राज्यों में कराई गई थी। क्या ये जानबूझकर किया गया क्या एक तरह से बुलडोजर बाबा को साइड किया गया। क्या योगी आदित्यनाथ की बढ़ती लोकप्रियता के कारण उनको दूर रखा गया या फिर योगी आदित्यनाथ की भाषा-शैली के कारण उनको दूर रखा गया ये बड़ा सवाल अब उठने लगा है। असम में पिछले चुनाव में योगी आदित्यनाथ ने 18 सभाएं की थी। इस बार दिखावे के तौर पर एक या दो सभाएं की थी। केरल में भाजपा के छोटे नेता तक सभाएं करने पहुंचे थे, महाराष्टï्र के मुख्यमंत्री भी पहुंचे थे, लेकिन योगी आदित्यनाथ की इस बार कोई चुनावी सभा वहां नहीं हुई। पिछली बार उनकी चुनावी सभाएं हुई थी जबकि भाजपा के सभी नेताओं के रोड शो भी हुए थे। तमिलनाडू में भी पिछली बार सभाएं हुई थी लेकिन इस बार नहीं हुई। पांडिचेरी में पिछली बार सभाएं हुई थी लेकिन इस बार नहीं हुई। पश्चिमी बंगाल में भी योगी आदित्यनाथ की कोई सभा नहीं हुई। जबकि गृहमंत्री अमित शाह वहीं कैंप किये हुए है और उनके 15 दिन के कार्यक्रम जारी कर दिये गये हैं। आखिरकार योगी आदित्यनाथ को इन चुनावी राज्यों से क्यों दूर रखा जा रहा है। क्या भाजपा हाईकमान को ये लगने लगा है कि योगी आदित्यनाथ की भाषा- शैली से चुनाव में नुकसान हो रहा है या फिर नरेंद्र मोदी के बाद जो योगी जी की लोकप्रियता है वो कहीं ना कहीं आगे बड़े नेताओं के लिए सिरदर्द ना बन जाए इसलिए उन्हें साइड किया जा रहा है जो भी हो योगी आदित्यनाथ को नजरअंदाज करना भाजपा को कहीं ना कहीं जरूर नुकसान पहुंचाएगा इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। जय हिंद