वाह री सियासत!
आज सियासत की तस्वीर बड़ी अजीबोगरीब होती जा रही है। हालांकि हमारे यहां इमोशनल राजनीति का बहुत चलन है। इमोशनल राजनीति से बहुत कुछ हासिल भी किया जाता है। महाराष्टï्र में जो कुछ हुआ उसने सबको हैरान कर दिया। एनसीपी के वरिष्ठ नेता बारामती के राजा महाराष्टï्र सरकार डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन क्रेश में दुनिया को छोड़ जाना हर एक को गमजदा कर गया। महाराष्टï्र में अजित पवार का एक अपना अटूट रिश्ता लोगों से था। वो इतने व्यवहारिक थे कि हरेक के दिल में वो स्थान रखते थे। उनकी मौत से महाराष्टï्र के लोग बहुत दुखी हैं। सरकार की ओर से तीन दिन का राष्टï्रीय शोक भी घोषित किया गया लेकिन इस बीच जो कुछ हुआ वो बहुत अजीबोगरीब था। अजित पवार की चिता की आग भी ठंडी नहीं हुई और परिवार गम से उभरा भी नहीं एनसीपी के नेताओं ने तत्काल अजित पवार की पत्नी को डिप्टी सीएम बनाने का फैसला लेते हुए उन्हें शपथ भी दिला दी। तीन दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित तमाम बड़े नेता दुख की घड़ी में साथ खड़े थे और शोक व्यक्त कर रहे थे। तीन दिन में ही शपथ हुई और फिर प्रधानमंत्री से लेकर तमाम बड़े नेता अजित पवार की पत्नी को बधाई देने लगे। किस बात की बधाई आखिरकार चिता की आग ठंडी होने से पहले शपथ दिलाने की जल्दी क्या थी। इसके अलावा वित्त मंत्रालय जो सबसे महत्वपूर्ण था वो नहीं दिया गया। शपथ के बाद लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हुई। कम से कम तेरहवीं के बाद ही शपथ होती या जो कुछ भी होता। हालांकि इसमें अजित पवार का परिवार भी क्यों तैयार हुआ। सीधे तौर पर मना होता कि अभी हम गम से उभरे भी नहीं है अभी हम कैसे शपथ ले लें। सीधे तौर पर इनकार करना चाहिए था। लेकिन वाह री सियासत एनसीपी को लेकर अंदरखाने बहुत कुछ खिचड़ी पक रही थी डर था कि कहीं कोई और बाजी ना मार ले। अफसोस इस बात का है कि जिसकी वजह से सबकुछ था जब वही दुनिया से चला गया तो फिर ये पद ये सत्ता किस काम की। अजित पवार की मौत को लोग हमेशा याद रखेंगे। लेकिन सियासत में जिस तरह चिता की आग ठंडी होने से पहले जो सियासत में इबारत लिखी है उसे भी लोग याद रखेंगे। जय हिंद