गाजियाबाद (युग करवट) गाजियाबाद के सभी जनप्रतिनिधि अब अपने-अपने हिसाब से राजनीति कर रहे हैं। सबकी कहीं ना कहीं कुछ अपनी राजनीतिक मजबूरियां हैं। जाहिर है सबको आने वाले चुनाव में अपनी किस्मत फिर से आजमाना है।
२०१७ में जब भाजपा सत्ता में आयी थी और गाजियाबाद की सभी सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी तब ये उम्मीद लगी थी कि प्रचंड बहुमत की सरकार और जिले में हर सीट पर भगवा का परचम लहरा है इसलिए अब गाजियाबाद में बहुत कुछ बदलाव दिखाई देगा। २०१७ में साहिबाबाद से विधायक सुनील शर्मा को सदर विधायक अतुल गर्ग मुरादनगर विधायक अजित पाल त्यागी और लोनी विधायक नंद किशोर गुर्जर ने अपना नेता माना था। उस समय विधायक रहे अतुल गर्ग ने कहा था कि किसी अधिकारी की शिकायत होगी या कोई विकास की बात होगी तो हम सभी लोग मिलकर सुनील शर्मा के नेतृत्व में अपनी बात रखेंगे। ऐसा पहली बार हुआ था जब सभी जनप्रतिनिधि एक साथ हो गये थे। लेकिन आहिस्ता-आहिस्ता माहौल बदलता गया। 15 साल बाद मिली सत्ता के चक्कर में सब अपनी-अपनी राह चलने लगे। अतुल गर्ग मंत्री बन गये थे और फिर २०२२ के विधानसभा चुनाव आते-आते सबकुछ बदल गया। २०२४ के लोकसभा चुनाव में अतुल गर्ग को टिकट मिल गया और वो सांसद बन गये और फिर उपचुनाव में महानगर अध्यक्ष रहे संजीव शर्मा को भाजपा का टिकट मिला और वो विधायक बन गये बस यहीं से जो गठजोड़ जनप्रतिनिधियों का २०१७ में बना था वो २०२४ तक आते-आते खत्म हो गया। सोने पर सुहागा ये हुआ कि इस बीच सुनील शर्मा ने कैबिनेट मंत्री के रूप में शपथ ले ली। आज स्थिति ये है कि सदर विधायक संजीव शर्मा सांसद अतुल गर्ग के साथ कांधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं और अतुल गर्ग भी पूरे तरीके से संजीव शर्मा के साथ हैं। २०१७ में सुनील शर्मा को जिन्होंने अपना प्रमुख माना था आज वो एक साथ भी नहीं बैठ पा रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा को लगता है कि सांसद अतुल गर्ग ने एक मजबूत ब्राह्मïण चेहरे के रूप में संजीव शर्मा को लॉन्च किया। वहीं मुरादनगर विधायक अजितपाल त्यागी हमेशा से ही अपनी राह चलते हैं। हालांकि वो कभी-कभी सांसद अतुल गर्ग के साथ जरूर देखे जाते हैं। सांसद अतुल गर्ग भी अब अपने आप ही अलग राह चल रहे हैं। अभी बजट को लेकर सांसद अतुल गर्ग ने अपने निवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में अन्य जनप्रतिनिधि नहीं थे। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पृथ्वी सिंह कसाना जरूर अतुल गर्ग के साथ मौजूद रहे। विधानसभा चुनाव 2027 की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। इसलिए संजीव शर्मा को लगता है कि टिकट के वितरण में क्षेत्रीय सांसद अतुल गर्ग की भूमिका जरूर रहेगी इसलिए वो उनका साथ नहीं छोड़ रहे हैं। बहरहाल, जनप्रतिनिधियों का अगर गठजोड़ मजबूत हो तो फिर विकास भी होता है और अफसरशाही भी हावी नहीं होती और अगर अलग-अलग होते हैं तो बहुत सी चीजें प्रभावित होती हैं।