सरकार ने यूजीसी संशोधन अध्यादेश लागू किया तो पूरे देश में इसका विरोध हुआ। शहर-शहर धरने-प्रदर्शन हुए। जुलुस निकाले गए, आंदोजन किए गए। डासना मंदिर के महंत महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी उन चंद लोगों में से एक हैं जिन्होंने सबसे पहले यूजीसी के नए नियमों से सवर्ण समाज के छात्रों को होने वाले उत्पीडऩ के बारे में आवाज उठाई थी। सवर्ण समाज के लोगों ने एक फरवरी को भारत बंद का आह्वïान किया था। महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी ने अपने शिष्यों एवं सहयोगियों के साथ जंतर मंतर पर धरना देने की घोषणा की। डाक्टर उदिता भी उनमें शामिल थीं। गाजियाबाद कमिश्नरेट पुलिस ने महामंडलेश्वर यति को डासना मंदिर और उदिता त्यागी को उनके घर पर हाउस अरेस्ट कर लिया। सवाल यह है कि क्या अब लोग अपनी आवाज भी नहीं उठा सकते? क्या अपने अधिकार की बात करना अपराध हो गया है? ऐसा क्यों है कि हम सरकार से सवाल भी नहीं कर सकते, अपना दर्द भी सरकार को नहीं सुना सकते। खैर इस ज्यादती के खिलाफ डाक्टर उदिता त्यागी ने गाजियाबाद कलक्ट्रेट पर अनशन की घोषणा कर दी। पुलिस ने सोमवार की सुबह फिर से उनके आवास पर डेरा डाल दिया। उनको घर से नहीं निकलने दिया गया। यह उत्पीडऩ की पराकाष्ठा रही। उदिता ने अपने राजनगर स्थित घर पर ही अनशन शुरू कर दिया है। सोमवार की रात कितनी सर्द थी यह सबको पता है, लेकिन सर्दी भी उदिता के इरादों को डिगा नहीं पाई। सारी रात उन्होंने अपने घर के बाहर गुजारी। यह बात समझ लीजिए कि महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी और डाक्टर उदिता त्यागी किसी व्यक्ति, समाज या वर्ग के खिलाफ नहीं हैं। उनका विरोध यूजीसी के नए नियम से है। उनकी लड़ाई स्वयं के लिए सवर्ण समाज के भविष्य के लिए है। अपने बच्चों के अधिकार और उनकी सुरक्षा के लडऩा किसी देश के किसी कानून में गुनाह नहीं हो सकता। इस लड़ाई में सर्व समाज को आगे बढक़र साथ आना चाहिए।