यूपी में ये क्या हो रहा है!
उत्तर प्रदेश में इस तरह की घटनाएं हो रही हैं जो चुनावी मौसम में सही नहीं है। अगले साल शुरू में यूपी में विधानसभा चुनाव होना है जिसकी तैयारी छह माह बाद शुरू हो जाएगी। इस बीच जिस तरह के घटनाक्रम यूपी में हो रहे हैं उससे यही लगता है कि कोई बड़ी साजिश योगी सरकार को बदनाम करने की हो रही है। दरअसल, योगी सरकार का कार्यकाल काफी सफल कार्यकाल चल रहा है। कानून व्यवस्था का राज है और एक मजबूत शासक के रूप में योगी की चर्चा होती है और योगी आदित्यनाथ एक हिंदुत्व चेहरे के रूप में स्थापित है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से यूपी में जो कुछ हो रहा है उससे महाराज की छवि को खराब करने की रणनीति के तौर पर देखा जा सकता है। जो शंकराचार्य अविमुक्तेश्वर जो हमेशा मोदी जी के खिलाफ रहते थे वो अब यूपी में योगी के खिलाफ धरने पर बैठ गये। योगी जी को सनातन विरोधी बताया, उनसे हिंदू होने का प्रमाण मांग लिया, उन्हें गोरक्षा का विरोधी बताया, लगातार कई दिन तक वो योगी जी के खिलाफ बोलते रहे और आगे भी बोलने की बात कर रहे हैं। पूरे प्रकरण उन्होंने कोई भी निशाना दिल्ली वालों पर नहीं लगाया। जाहिर है कि यहां भी कहीं ना कहीं कोई रणनीति हो सकती है। अब कल जिस तरह से योगी जी के खासम खास मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह को भाजपा के ही विधायक ठाकुर जी ने महोबा में एक तरह से बंधक बना लिया। उनकी गाडिय़ां रोक ली, सैकड़ों प्रधानों ने मंत्री जी को घेर लिया और आरोप लगाया कि मोदी जी की योजना नमामि गंगा का कोई काम योगी सरकार नहीं कर रही है। सडक़ों का बुरा हाल है। जब अपनी ही पार्टी के विधायक मंत्री का घेराव करेंगे, सरकार द्वारा काम नहीं करने की बात करेंगे तो फिर विपक्ष का जो आरोप है कि सरकार काम नहीं कर रही है उसे बल मिलेगा। ये भी एक बड़ी रणनीति के तहत हो रहा है। आखिरकार जब सत्तारूढ़ विधायक ही मंत्री का घेराव करेंगे तो फिर आम जनता के सामने भाजपा या सरकार के लोग कैसे जाएंगे। वहीं कल हाईकोर्ट ने योगी सरकार की पुलिस को भी कटघरे में खड़ा कर दिया। हाफ् एनकाउंटर को लेकर योगी सरकार की पुलिस को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि किसी भी हाल में ये स्वीकार नहीं होगा। प्रमोशन और रील बनाने के चक्कर में पुलिस किस तरह गोलियां मार रही है ये किसी भी हाल में स्वीकार नहीं है। जाहिर है एक तरह योगी सरकार की पुलिस पर एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है। वहीं कल पीडब्ल्यूडी के एक अधिकारी को भाजपा विधायकों के प्रतिनिधियों ने कमरे में बंद करके पीटा और सादे कागज पर कुछ साइन कराने की बात भी सामने आयी है। पीडब्ल्यूडी अधिकारी ने सीधे तौर पर भाजपा के दो विधायकों पर आरोप लगाये हैं, ये भी गंभीर मामला है। अब चुनाव में कुछ समय बचा है और इस तरह के घटनाक्रम होते रहे तो फिर किस तरह का माहौल होगा ये बताने की जरूरत नहीं है। जय हिंद