ऐसे अनेक कार्यकर्ता थे जिनको उम्मीद थी कि उनको भाजपा मेन में ना सही मगर मोर्चों में तो पद मिल ही जाएगा। भाजपा के मोर्चों में महानगर अध्यक्ष बनने के लिए भी बहुत से कार्यकर्ता कतार में थे। भाजपा में सबसे ज्यादा मारामारी युवा और महिला मोर्चा में होती है। सम्मान और जिम्मेदारी भी इन्हीं दो मोर्चों को ज्यादा मिलती है। इसके बाद आबीसी और किसान मोर्चा का नबर माना जाता है। भाजपा महानगर में गाजियाबाद सदर, मुरादनगर और साहिबाबाद तीन विधानसभाओं का क्षेत्र आता है। जाहिर है कि तीनों विधानसभा क्षेत्रों से ही कार्यकर्ताओं ने युवा, महिला, किसान, ओबीसी और एससी मोर्चे के महानगर अध्यक्ष के लिए दावेदारी की होगी। अब तक भाजपा ने ओबीसी, किसान और एससी मोर्चा के महानगर अध्यक्षों की घोषणा कर दी है। तीनों मोर्चों के नए बनाए गए अध्यक्ष साहिबाबाद विधानसभा से ही आते हैं। भाजपा ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष राहुल गिरी गोस्वामी, किसान मोर्चा के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव और एससी मोर्चा के अध्यक्ष वेदप्रकाश ये तीनों साहिबाबाद विधानसभा क्षेत्र के ही निवास हैं। अब मैं तो इसे इत्तेफाक ही कहूंगा मगर भाजपा के कार्यकर्ता इसे कुछ और ही नाम दे रहे हैं। भाजपा के अंदर ही सवाल भी पूछा जा रहा है कि मोर्चों के गठन में केवल साहिबाबाद विधायक एवं कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा की ही चल रही है या बाकी के जनप्रतिनिधि भी साहिबाबाद पर ही फोकस कर रहे हैं। यदि ऐसा नहीं होता तो किसी एक मोर्चे की जिम्मेदारी गाजियाबाद या मुरादनगर के किसी कार्यकर्ता को भी दी जा सकती थी। अभी युवा और महिला मोर्चों की घोषणा होनी बाकी बची है। यहां जो नाम सर्वाधिक चर्चा में हैं वह भी साहिबाबाद से ही बताए जा रहे हैं। यदि सिद्घि प्रधान और संदीप चौधरी को भी मोर्चों की कमान मिल गई तो भाजपा के सभी मोर्चों पर साहिबाबाद विधानसभा का ही कब्जा हो जाएगा। ऐसे में सवाल खड़ा हो जाएगा कि भाजपा के दूसरे जनप्रतिनिधि क्यों अपनी विधानसभा के किसी कार्यकर्ता को मोर्चे की जिम्मेदारी नहीं दिला पाए। उस स्थिति में कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा का पलड़ा और अधिक भारी हो जाएगा और संदेश यही जाएगा कि संगठन पर सुनील शर्मा की पकड़ आज भी सबसे ज्यादा है। बहरहाल अभी युवा और महिला मोर्चा की घोषणा का इंतजार है।