गाजियाबाद (युग करवट)। योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में पश्चिमी यूपी के कई नए चेहरों को जगह मिल सकती है। कई मंत्रियों का कद बढ़ सकता है, तो कुछ मंत्रियों को हटाए जाने की भी अटकलें हैं। भाजपा संगठन और सरकार की मंशा मंत्रिमंडल में उन जिलों के नेताओं को शामिल करने की है, जिन्हें अभी तक प्रतिनिधित्व नहीं मिला है। पिछले सप्ताह हुई कोर कमेटी की बैठक में इस पर मुहर लग चुकी है। मंत्रिमंडल में विस्तार में भी जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की तैयारी है। योगी सरकार के मंत्रिमंडल के प्रस्तावित फेरबदल में पश्चिमी यूपी के उन जिलों के विधायकों को मंत्री बनाया जा सकता है, जहां से अभी तक कोई मंत्री नहीं बना है। मंत्रिमंडल में छह पद इस समय खाली है। इनमें बिजनौर, बुलंदशहर, गौतमबुद्धनगर, अमरोहा, हापुड़, शामली, मुरादाबाद जिले से कोई मंत्री सरकार में शामिल नहीं है। जबकि मेरठ, गाजियाबाद से दो-दो मंत्री हैं। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना तय माना जा रहा है। उन्हें मंत्री बनाकर जाट समाज को संदेश दिया जा सकता है। मेरठ निवासी एमएलसी धर्मेंद्र भारद्वाज को मंत्री बनाकर ब्राह्मण समाज की नाराजगी दूर की जा सकती है। त्यागी समाज का भी पश्चिमी उत्तर प्रदेश से कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। ऐसे में मुरादनगर विधायक अजीतपाल त्यागी और एमएलसी अश्विनी त्यागी मंत्री बनने के दावेदार हैं। गुर्जर समाज से आने वाले पूर्व मंत्री अशोक कटारिया को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल कर गुर्जरों का असंतोष दूर करने की बात कही जा रही है।
विधानसभा चुनाव में अधिक समय नहीं होने के कारण यूपी सरकार के मंत्रिमंडल में दो-तीन दिन के अंदर ही फेरबदल की संभावना है। इसके बाद भाजपा सरकार में खाली पड़े आयोगों, निगमों, बोर्डों के पदों को भरा जाएगा, ताकि कार्यकर्ताओं की नाराजगी को दूर की जा सके। इसके बाद क्षेत्रीय अध्यक्षों की घोषणा होने की उम्मीद है। बचे नेताओं को प्रदेश कार्यकारिणी में स्थान दिया जाएगा।