इसे आप क्या कहेंगे
उत्तर प्रदेश में इस समय कुछ सही नहीं चल रहा है। सरकार के अंदर ही कई गुट बन गये हैं तो वहीं भाजपा भाजपा को ही हराने में लग गई है। मेरी शर्ट सबसे सफेद यही साबित करने में अब कुछ नेता लग गये हैं। १८ जनवरी २०२६ को प्रयागराज में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ जो कुछ हुआ और उनके शिष्यों बटुको ब्राह्मïणों को जिस तरह पीटा गया, उनकी शिखाएं खीचीं गई और कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं हुआ। इतना ही नहीं १८ जनवरी को शंकराचार्य को प्रशासन ने नोटिस थमा दिया और कहा कि आप साबित करें कि आप शंकराचार्य हैं। हालांकि यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या जरूर शंकराचार्य के साथ खड़े नजर आये। अब एक माह बाद जिन बटुको ब्राह्मïणों की शिखाएं खीचीं गई थी, जिनकी पिटाई की गई थी कल उन्हीं 101 ब्राह्मïणों को बुलाकर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उनका सम्मान किया, उनको तिलक लगाया। इससे पहले ब्रजेश पाठक ने एक बयान भी जारी किया जिसमें कहा कि बटुको ब्राह्मïणों के साथ जो कुछ वो माफ करने के लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि शिखाएं खींचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और जिन्होंने ये घिनौना काम किया है उन्हें भगवान भी माफ नहीं करेगा। आखिरकार कार्रवाई कौन करेगा? किसे भगवान माफ नहीं करेगा? ये बड़ा सवाल है। सरकार भी ब्रजेश पाठक की है, शिखाएं खींचने वाली पुलिस भी यूपी की है फिर निशाना किस पर है। क्या ये सीधा निशाना मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर है। क्योंकि अभी हाउस में मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा था कि किसी के लिखने से कोई शंकराचार्य नहीं हो जाता। उन्होंने कहा था कि वो सब सपा के शंकराचार्य हैं। इतना ही नहीं शिखाएं खींचने वालों के खिलाफ कार्रवाई का एक शब्द भी मुख्यमंत्री की जुबान से नहीं निकला। अब उन्हीं की सरकार के डिप्टी सीएम, उन्हीं की पार्टी के वरिष्ठ नेता ब्रजेश पाठक उन्हीं ब्राह्मïणों का सम्मान कर रहे हैं जिनको पुलिस ने पीटा था, शिखाएं खीचीं थी। आखिरकार ये राजनीति कहां जा रही है। किसके खिलाफ माहौल बनाया जा रहा है। ये बड़ा सवाल है। १८ जनवरी के बाद ठीक १८ फरवरी को डिप्टी सीएम का बयान आता है और वे शंकराचार्य के साथ खड़े नजर आते हैं। १९ फरवरी को बटुकों का सम्मान होता है। जय हिंद