अगर मोक्ष दायिनी गंगा है तो जीवन दायिनी हिंडन भी थी। सात जिलों के हजारों लोगों को सैंकड़ों वर्षों तक जीवन देती आई हिंडन आज खुद मृत अवस्था में है। हिंडन खुद लोगों से अपना जीवन बचाने की प्रार्थना करती सी प्रतीत होती है। बीते कई वर्षों अनेक प्रयास अनेक लोगों द्वारा किए गए। असफल तो किसी प्रयास को कहना गलत होगा, मगर कोई प्रया सफल होता भी नहीं दिखा। शासन-प्रशासन भी कई योजनाएं चला चुका है। कुछ सरकारी योजनाएं अभी चल भी रही हैं। मगर सकारात्मक परिणाम का अभी भी इंतजार है। अब हिंडन को जीवन देने का प्रयास और शुरू हुआ है। मार्च महीने में हिंडन नदी शोध यात्रा शुरू की जा रही है। यह यात्रा 15 मार्च को सहारनपुर से शुरू होगी और 19 मार्च को नोएडा में वहां समाप्त होगी जहां हिंडन यमुना में मिल जाती है। हिंडन शोध यात्रा उन सातों जनपदों से होकर गुजरेगी जहां जहां से हिंडन का प्रवाह है। हिंडन नदी की हालत आज किसी से छुपी नहीं है। गाजियाबाद में तो यह नाला मात्र नजर आती है। अगर अभी भी इसे नहीं बचाया गया तो नाला भी नहीं बचेगा। हिंडन शोध यात्रा में केवल सातों जनपदों के ही नहीं बल्कि पूरे पश्चिम यूपी और दिल्ली के लोगों को भी आगे आना चाहिए। हिंडन के अस्तित्व को बचाने के लिए सातों जनपदों के लोगों को एक साथ आकर एक युद्घ लडऩा पड़ेगा। हिंडन शोध यात्रा को एक धर्मयुद्घ की तरह देखना चाहिए। इस धर्म युद्घ में हर व्यक्ति को आहुति देने की आवश्यकता है। हम आज भी नहीं चेते तो आने वाली पीढिय़ों को पर्यावरण में जहर के अलावा कुछ नहीं देकर जाएंगे। गाजियाबाद और नोएडा के नजरिए से तो हिंडन का महत्व बहुत ही अधिक है। यहां के खत्म होते ग्राउंड वाटर को बचाने में हिंडन ही सहायक हो सकती है। रिवर मैन के रूप में पहचाने जाने वाले रमाकांत जैसे व्यक्ति का साथ देने की जरूरत है। जिन्होंने हिंडन शोध यात्रा निकालने का बीड़ा उठाया है। मेरा तो यही आग्रह है कि गाजियाबाद का प्रत्येक व्यक्ति इस यात्रा में शामिल हो और अपना योगदान दे।