मुलाकातों से निकलता है संकेत
दिल्ली में बैठे हाईकमान कोई भी फैसला लेने में नफे-नुकसान की परवाह नहीं करते, इसमें कोई दोराय नहीं है। उनको जो फैसला लेना होता है वो लेते हैं। ऐसे-ऐसे फैसले लिये जा रहे हैं जिसकी लोगों ने कल्पना भी नहीं की थी। बिहार में नीतीश कुमार के साथ जो हुआ वो सभी के सामने है। दरअसल, दो साल से यूपी में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा चल रही थी लेकिन यूपी में अभी कुछ नहीं हुआ और नीतीश कुमार हटा दिये गये। अब एक मुलाकात राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की परिवार सहित प्रधानमंत्री से हुई। ये मुलाकात एक बड़ा संकेत है। ढाई साल से खामोश वसुंधरा राजे सिंधिया एकदम सक्रिय हो गईं। अभी 12 दिन पहले 28 फरवरी को अजमेर में बड़ी रैली हुई जिसमें प्रधानमंत्री को वसुंधरा राजे सिंधिया को पूरा भाव दिया। रैली में वसुंधरा राजे एक ऐसी नेता रहीं जिनका नाम जब मंच पर लिया गया तो रैली में हजारों की संख्या में लोगों ने उनके नाम पर तालियां बजाई। जाहिर है कि ये अपने आप में इस बात का संकेत है कि राजस्थान में वसुंधरा राजे के बिना कुछ नहीं है। सूत्र बताते हैं कि रैली के बाद वसुंधरा राजे सिंधिया की मुलाकात पहले संघ प्रमुख से हुई और फिर अभी दो दिन पहले परिवार सहित प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाकात हुई। मुलाकात के बाद ये संकेत मिल रहे हैं कि राजस्थान की कमान एक बार फिर वसुंधरा राजे को सौंपी जा सकता है। वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा कोई भी खास पार्टी के लिए नहीं कर रहे हैं। हालांकि उनका कोई राजनीतिक बड़ा इतिहास भी नहीं रहा है। वो एक बार भाजपा के खिलाफ भी चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन 2023 में पार्टी ने एक नये प्रयोग के तहत भजन लाल शर्मा को मुख्यमंत्री बना दिया था। लेकिन ये प्रयोग सफल होता दिखाई नहीं दे रहा है इसलिए एक बार फिर अब पार्टी को और मजबूत करने के लिए वसुंधरा राजे को कमान दी जा सकती है। वहीं उत्तर प्रदेश में भी ब्राह्मïणों और पीडीए को अपने पक्ष में करने के लिए यूपी में भी कुछ बड़ा परिवर्तन होने जा रहा है, इसके भी संकेत मिले हैं। जय हिंद