उत्तर प्रदेश में सरकारी मशीनरी और सरकार
उत्तर प्रदेश में इस समय अधिकारियों के अंदर एक अजीब सी बेचैनी देखी जा रही है। कुछ अधिकारी खूब मौज काट रहे हैं तो कुछ अधिकारी अपनी पोस्टिंग को लेकर बहुत परेशान हैं। ईमानदार अफसरों को पोस्टिंग नहीं मिल रही है ऐसा आरोप अंदरखाने सरकारी मशीनरी के बीच लगाया जा रहा है। अनुशासन में बने होने के कारण खुलकर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है लेकिन कहीं ना कहीं कुछ ईमानदार अधिकारी जब व्यवस्था में फिट नहीं बैठ रहे हैं तो फिर उनके पास इस्तीफा देने के अलावा कोई रास्ता नहीं हैं। कई आईएएस पहले भी इस्तीफा दे चुके हैं। कल चर्चित आईएएस रिंकू सिंह ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया। २०२३ बैच के आईएएस रिंकू कुमार की छवि बहुत ही ईमानदार अधिकारी के रूप में देखी जाती है। करोड़ों का घोटाला उजागर करने पर उनको सात गोलियां भी लगी थी। आज भी कई गोलियां रिंकू सिंह के शरीर में हैं। लेकिन घोटाला उजागर होने के बाद और गोलियां खाने के बाद भी रिंकू सिंह को कोई पोस्टिंग नहीं मिली। उन्होंने राष्टï्रपति को भेजे त्याग पत्र में कहा कि ईमानदारी की कीमत चुकाना पड़ रही है। काफी समय से उन्हें कोई काम नहीं दिया गया। ऐसे में वो बिना काम के वेतन ले रहे हैं जो उन्हें स्वीकार नहीं है। एक आईएएस जिसने सात गोलियां खाई हो, घोटाला उजागर किया हो, गोलिया खाई हो फिर उसे साईड डाल दिया जाए तो स्वाभाविक है कहीं ना कहीं आत्मा पर जोर पड़ता है। 2017 के बाद से कई आईएएस इस्तीफा दे चुके हैं। इसी साल आईएएस अमोद कुमार सिंह, आईएएस अनामिका सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और अब रिंकू सिंह ने ईमानदारी की सजा के तौर पर इस्तीफा दिया है ये अपने आप में बड़ा सवाल है। बहरहाल कुछ अधिकारी ऐसे हैं जो मौज भी काट रहे हैं और वो मंत्रियों को कुछ नहीं समझ रहे हैं क्योंकि लोक भवन में बैठे बड़े अफसरों का उन्हें आशीर्वाद प्राप्त है। हालांकि लोक भवन में भी खूब गुटबाजी चल रही है। कई अधिकारी ऐसे हैं जिनके पद तो बहुत बड़े हैं लेकिन पावर उनके पास कुछ नहीं है। नाम बड़े दर्शन छोटे वाली कहावत उनके लिए सही बैठ रही है। कुछ ऐसे हैं जो सीधे महाराज जी के निकट है और सही मायनों में वही प्रदेश चला रहे हैं। एक मंत्री द्वारा कन्नौज के जिलाधिकारी के बारे में जो पत्र लिखा गया है और जो उसका मजमून है वो अपने आप में एक बहुत बड़ा आईना है कि किस तरह सरकारी मशीनरी काम कर रही है। जय हिंद