कब आएंगे अच्छे दिन
भाजपा हाईकमान कार्यकर्ताओं को घर पर बैठने नहीं देता। सर्दी, गर्मी, बरसात भी में कार्यकर्ता भाजपा का झंडा बुलंद किये रहते हैं लेकिन जब उन्हें कुछ मिलने का समय आता है तो फिर उन कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज कर दिया जाता है। यूपी में दूसरी बार चार साल सरकार को बने हो गये लेकिन अभी तक किसी भी कार्यकर्ता को किसी भी पद पर मनोनीत नहीं किया गया। प्रदेश में आठ हजार ऐसे पद हैं जहां पर कार्यकर्ताओं को मनोनीत करके उनको तोहफा दिया जा सकता है लेकिन कार्यकर्ता अच्छे दिनों की आस में चार साल से इंतजार में हैं। अधिकारियों को सेवानिवृत्ति के बाद तत्काल उन्हें कहीं ना कहीं एडजेस्ट किया जा रहा है। कई को कर भी दिया गया है, कई होने वाले हैं लेकिन पार्टी की रीढ़ कही जाने वाले कार्यकर्ता सालों से इंतजार में ही हैं। नगर पालिका, नगर पंचायत और नगर निगम, प्राधिकरण के अलावा अन्य ऐसे सरकार संस्थान हैं जहां पर कार्यकर्ताओं का मनोनयन होता है उससे उनका सम्मान बढ़ता है। एक कार्यकर्ता को सम्मान ही चाहिए होता है। भाजपा यूपी में दूसरी बार लगातार सत्ता में है उसके बाद भी कार्यकर्ताओं को कुछ नहीं मिल रहा है। बोर्ड बैठक हो या अन्य संस्थान हो कहीं भी कोई भी मनोनयन नहीं हो रहा है। अगले साल शुरूआत में ही यूपी में विधानसभा चुनाव हो जाएंगे और फिर कार्यकर्ताओं से कहा जाएगा अगले चुनाव की तैयारी में लगे आगे आपको मौका देंगे। अफसोस की बात ये है कि पार्टी जिनके बल पर आज मजबूती के साथ खड़ी है उन्हीं कार्यकर्ताओं के साथ आखिरकार कब तक अन्याय होता रहेगा। भाजपा में हमेशा समर्पित कार्यकर्ताओं का सम्मान होता रहा है लेकिन एक दशक से दूसरे दलों से आने वाले नेताओं को अब पूरा सम्मान ही नहीं मिल रहा है बल्कि उनको महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां भी मिल रही हैं। ठीक है सत्ता के लिए कुछ भी किया जा सकता है लेकिन इतिहास गवाह है कि जिन राजनीतिक दलों ने अपने कार्यकर्ताओं की अनदेखी की फिर वो भी इतिहास बनकर रह गये। इसलिए जरूरत इस बात की है कि सत्ता के नशे में अपने समर्पित को भाजपा हाईकमान ना भूले और समय रहते उन्हें वो सम्मान दे जिसका वो अधिकार रखते हैं। आज कुछ मिलेगा तो फिर वो मजबूती के साथ खड़े होंगे वरना सत्ता तो आती जाती रहती है वक्त निकल जाता है तो फिर लकीर पीटने से कुछ नहीं हो सकता। जरूरत इस बात की है कि अपने समर्पित कार्यकर्ताओं को पूरा सम्मान दें और चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं को कहीं ना कहीं एडजेस्ट जरूर करें ताकि वो फिर नये जोश के साथ २०२७ की तैयारी में जुट जाएं। जय हिंद