सिटी मजिस्टे्रट का इस्तीफा
यूजीसी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक दम ठंड के मौसम में भी गरमाहट आ गई है। जहां पारा नीचे गिर रहा है वहीं राजनीति का पारा बहुत ऊपर चल रहा है। दरअसल भाजपा की सरकारें जब भी रहीं है उसमें हमेशा अफसरशाही हावी रही है। इस बार कुछ ज्यादा ही अफसरशाही हावी दिखाई दे रही है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के स्नान को लेकर जिस तरह अफसरों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को गलत रिपोर्ट दी और उन्होंने ये भी कहा कि ये शंकराचार्य नहीं है इस संबंध में हम नोटिस जारी करते हैं। ऐसा पहली बार हुआ है जब सरकारी अफसर किसी साधू-संत से नोटिस द्वारा शंकराचार्य से प्रमाण मांगा जा रहा है। इतने दिन बाद भी अभी तक किसी अफसर के खिलाफ कोई कार्रवाई भी नहीं हुई है। सोने पर सुहागा बरेली के सिटी मजिस्टे्रट अलंकार अग्निहोत्री ने शंकराचार्य जी के साथ अभ्रद व्यवहार और यूजीसी के नियम को लेकर इस्तीफा दे दिया। इससे बरेली से लेकर लखनऊ तक हडक़ंप मच गया। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया ता उनका कहना था कि सरकारी मशीनरी को क्या हो गया। बताते हैं कि लखनऊ से बडे अधिकारी ने बरेली के बड़े अधिकारी से बात की। इस दौरान डीएम बरेली जब बड़े अधिकारी से बात कर रहे थे तो स्पीकर ऑन था, लखनऊ बैठे अधिकारी ने कहा कि ये पंडित पगला गया है, ये शब्द सुनकर वहां मौजूद सिटी मजिस्टे्रट घबरा गये। उनका कहना है कि डीएम ने उनको कई घंटे तक बंधक बनाए रखा। इस घटना के बाद यूपी की राजनीति में और गरमाहट आ गई। क्योंकि ब्राह्मण समाज पहले से ही भाजपा से नाराज चल रहा है। इसके पीछे कई कारण हैं लेकिन मुख्य कारण नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी द्वारा ब्राह्मïणों की बैठक को लेकर दिया गया बयान है। ब्राह्मïणों का कहना है कि कुर्मी और ठाकुरों की बैठक हुई उस पर कुछ नहीं हुआ और ब्राह्मïणों की बैठक पर प्रदेश अध्यक्ष आगबबूला हो गये। अब यूजीसी में जिस तरह से नियम बने हैं इससे अगड़ी जातियों के लोग भी आक्रोश में हैं। दरअसल, सबस अहम मुद्दा इस वक्त शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर चल रहा है। इस मुद़्दे में सिटी मजिस्ट्रेट के इस्तीफेे ने आग में घी डालने का काम किया है। दरअसल, क्या इन तमाम घटनाओं के पीछे यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कोई बड़ी साजिश चल रही है ये बड़ा सवाल है। उत्तर प्रदेश में 11 महीने बाद चुनाव होना है ऐसे में इस तरह की राजनीति में गरमाहट आना ये अच्छा संकेत नहीं है। जय हिंद