गंगा पर इफ्तार पार्टी
ऐसी-ऐसी घटनाएं हो रही हैं जो बिना बात के विवाद पैदा कर रही हैं। बनारस में मां गंगा पर बीच बोट पर बैठकर इफ्तार पार्टी की गई। आखिरकार यहां पर इफ्तार पार्टी करने का क्या मकसद था? क्या संदेश देना चाहते थे? रोजा, रमजान एक ऐसा पवित्र महीना होता है जिसमें आपसी सौहार्द और एक दूसरे को इस बात का संदेश दिया जाता है कि रोजा रखकर ऊपर वाले को खुश किया जा सके। किसी धर्म का व्रत हो वो पूरी तरह से आस्था दर्शाता है। एक अच्छा संदेश देता है लोग रोजेदारों का सम्मान करते हैं, जिनके व्रत होते हैं उनका भी सम्मान होता है, लेकिन कुछ लोगों ने मां गंगा पर बीच में बैठकर इफ्तार पार्टी की और नॉनवेज का इस्तेमाल किया। ऐसे लोगों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की, १४ लोगों को हिरासत में लिया गया। मां गंगा जो सभी के लिए पवित्र है। मां गंगा पर बहुत गीत भी लिखे गये हैं जिसमें सभी धर्म और जातियों का जिक्र है। सबसे चर्चित गीत है ‘कोई वजू करे मेरे जल से, कोई मूरत को नहलाए। मानो तो मैं गंगा जल हूं, ना मानो तो बहता पानी।’ पवित्र गंगा के बीच में बैठकर नॉनवेज का प्रयोग करना आखिरकार कहां तक सही था। क्या कोई बड़ी साजिश थी इसके पीछे। रोजा एक पवित्र होता है, ये पिकनिक मनाने के लिए नहीं होता। गंगा किनारे बैठकर अगर आस्था के साथ रोजा इफ्तार होता कोई नॉनवेज का प्रयोग नहीं होता तो एक अच्छा आस्था का संदेश जाता। लेकिन ये सीधा-सीधा आस्था से खिलवाड़ है। ये जानबूझ का ऐसा कृत्य किया गया जिसे कोई भी धर्म स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे लोगों के खिलाफ जो कार्रवाई हुई बिल्कुल सही हुई है। तीसरी आंख ने देखा कि मां गंगा में बैठकर वीडियो भी बनाई जा रही है। नॉनवेज के बर्तन भी रखे गये हैं ये बहुत ही निदंनीय है। अगर यही काम कोई दूसरे समुदाय के लोग विशेष समुदाय के साथ कर देते तो फिर दूसरा रंग दिया जाता । हर धर्म का सम्मान हो, किसी धर्म की आस्था से नहीं खेलना चाहिए, ऐसी मानसिकता के खिलाफ और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि फिर कोई किसी की आस्था से ना खेले। हर त्योहार हर पल एक अच्छा संदेश देता है लेकिन कुछ लोग अपनी मानसिकता के चलते चाहे वो किसी भी धर्म को हो एक नया विवाद पैदा कर देते हैं। जय ंिहंद