स्पीकर के खिलाफ नोटिस
आज अगर किसी चीज का सबसे ज्यादा टोटा है तो विश्वास का है। परिवार हो, दोस्त हो, राजनीति हो, कोई भी क्षेत्र हो सबसे ज्यादा विश्वास का टोटा है। कोई कितना भी करीब हो, कोई कितना भी अजीज हो विश्वास की बात आती है तो कोई भी एक-दूसरे पर नहीं करता। ये बहुत ही समाज के लिए घातक है। किसी से भी आप बात करिए वो कितना भी आपका करीब हो वो आपसे यही कहेगा वॉटसएप कॉल करें। जाहिर है कि वो विश्वास नहीं करता। इसलिए आपसे वॉट्सएप कॉल की बात करता है। क्योंकि उसको विश्वास नहीं है इसीलिए नॉर्मल कॉल नहीं करता कि कहीं रिकॉर्डिंग ना हो जाए। ये समाज की बात है लेकिन संवैधानिक पद पर बैठे लोगों के प्रति अगर विश्वास कम होगा तो फिर लोकतंत्र कमजोर होगा। लोकतंत्र कमजोर होगा तो देश कमजोर होगा। देश की सबसे बड़ी पंचायत लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ सांसदों ने अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया है। लोकसभा का स्पीकर का पद सभी को एक समान देखने के लिए होता है। हालांकि जिसकी सत्ता होती है उसी के बहुमत से लोकसभा और विधानसभा स्पीकर बनते हैं। लेकिन जब वो संवैधानिक कुर्सी पर बैठते हैं तो उनके लिए सभी सांसद बराबर होते हैं। लेकिन ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आना इस बात का प्रमाण है कि यहां भी विश्वास का टोटा है। अगर एक बार किसी पर अविश्वास हो जाए तो फिर कितना भी प्रयास हो जाए वो विश्वास पैदा नहीं होता। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस से कुछ होने वाला नहीं है। संख्या बहुत कम है सभी सांसदों ने नोटिस पर साइन नहीं किये हैं लेकिन चाहे एक व्यक्ति भी अविश्वास की बात करता है तो ये गंभीर बात है। लोकसभा स्पीकर ने नोटिस के बाद लोकसभा में नहीं जाने का निर्णय लिया है ये भी अपने आप में एक बड़ा सवाल है। अविश्वास प्रस्ताव गिर जाएगा तो क्या फिर लोकसभा स्पीकर विश्वास कायम करने का प्रयास करेंगे। जब विश्वास में कहीं ना कहीं गांठ पड़ जाती है तो फिर रास्ते आसान नहीं होते। संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को ये बात समझना चाहिए और उन्हें सभी को एक ही चश्मे से देखना चाहिए। क्योंकि जिस आसन पर वो बैैठे हैं वहां पर बैठकर विश्वास पैदा करना उनकी अहम जिम्मेदारी है। बहरहाल, इस तरह के नोटिस नहीं आना चाहिए। जय हिंद