हाउस टैक्स का मामला
गाजियाबाद (युग करवट)। नगर निगम द्वारा बेतहाशा हाउस टैक्स बढ़ाने से आम जनता परेशान है। नगर निगम में जनता ने प्रचंड बहुमत भाजपा को दिया था और इस उम्मीद के साथ दिया था कि उनकी समस्याओं का समाधान होगा। हाउस टैक्स को लेकर एक साल से जनता परेशान है और अब स्थिति ये हो गई है कि मेयर सुनीता दयाल किसी कार्यक्रम में जाती हैं तो लोग हाथ जोडक़र उनसे अपील करते हैं बढ़े हुए टैक्स से निजात दिला दें।
अभी हाल ही में एक शोकसभा में पहुंची मेयर जब बैठी थी तो वहां पर जानेमाने अधिवक्ता वेदपाल कुशवाह ने मेयर से बहुत ही विनम्रता के साथ अपील की थी कि महापौर जी अब बढ़े हुए टैक्स से निजात दिला दें। मेयर भी लोगों के सवालों से परेशान रहती हैं क्योंकि मेयर खुद चाहती है कि बढ़ा हुआ टैक्स वापस हो। सुनीता दयाल ऐसी प्रथम मेयर होंगी जिन्होंने बढ़े हुए टैक्स के खिलाफ बोर्ड बैठक बुलाकर प्रस्ताव तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया और अधिकारियों को निर्देश दिये कि पहले सर्वे करें फिर नया टैक्स लागू हो। अखबारों में भी लगातार मेयर ने लोगों से अपील की कि वो बढ़ा हुआ टैक्स जमा ना करें साथ ही उन्होंने कई बार टैक्स में बीस प्रतिशत छूट की भी घोषणा की है। लेकिन मामला इस बीच हाईकोर्ट में चला गया और ले जाने वाले भी भाजपा के ही लोग हैं। अब जब मामला अदालत में होता है तो उसमें मेयर भी क्या कर सकती हैं। लेकिन क्योंकि वो जनप्रतिनिधि हैं, जनता ने उन्हें वोट दिया है इसलिए लोग सवाल तो उन्हीं से करते हैं। मेयर भी चाहती है कि बढ़ा हुआ टैक्स वापस हो लेकिन हाउस टैक्स में मामला विचाराधीन होने के कारण वो बेबस हैं। जनता तो सवाल करेगी और जनप्रतिनिधि को जवाब देना पड़ेगा इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता। अब देखना होगा हाईकोर्ट से जनता को कितनी राहत मिलती है।