आप और हम किसी विधायक या सांसद को क्यों चुनते हैं? सीधा सा सवाल है कि क्षेत्र के विकास के लिए, शासन की योजनाओं के लाभ के लिए। सभी विधायक और सांसद अपने क्षेत्र का समुचित विकास कर सकें, जनसुविधाएं दिला सकें इसके लिए शासन द्वारा इन जनप्रतिनिधियों को एक निधि दी जाती है। विधायकों को पांच करोड़ रुपए के विकास कार्य कराने की अनुमति है। बीती 17 फरवरी को युग करवट ने प्रमुखता से समाचार प्रकाशित कर बताया था कि गाजियाबाद के जनप्रतिनिधियों ने अपनी कितनी निधि खर्च की है। इसमें सबसे पीछे केबिनेट मंत्री और साहिबाबाद विधायक सुनील शर्मा रहे तो सबसे आगे विधायक नंदकिशोर गुर्जर का नाम रहा। लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर चार करोड़ 81 लाख रुपए अपने क्षेत्र में लगा चुके हैं। उनकी निधि में से मात्र 18 लाख रुपए ही बचे हैं। शहर विधायक संजीव शर्मा ने भी चार करोड़ से अधिक खर्च कर दिए हैं। मुरादनगर विधायक अजितपाल त्यागी एक करोड़ से कुछ अधिक की राशि ही लगा पाए हैं। केबिनेट मंत्री सुनील शर्मा की पूरी की पूरी निधि शेष है। एमएलसी दिनेश गोयल भी चार करोड़ से अधिक की धनराशि के काम करा चुके हैं। नरेन्द्र कश्यप तीन करोड़ से अधिक रुपए विकास कार्यों में लगा चुके हैं। पाठको को याद होगा कि पिछले वित्तीय वर्ष में भी गाजियाबाद के कई जनप्रतिनिधियों की विकास निधि लेप्स हुई थी। मेरा कहना यह है कि जब गाजियाबाद की जनता अपने विधायकों का फूल मालाओं से स्वागत सम्मान करती है तब यह सवाल क्यों नहीं पूछती कि आखिर वह क्षेत्र में विकास निधि क्यों खर्च नहीं कर रहे हैं। क्यों हर साल विकास निधि का पैसा लेप्स हो जाता है। क्या इसीलिए गाजियाबाद की जनता ने लाखों वोट देकर उनको जिताया था? लेकिन बात तो यही है कि अब जनता ने अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल ही पूछने बंद कर दिए हैं। सवाल ना पूछने की यही नीति अब क्षेत्र पर भारी पडऩे लगी है।