स्नातक विधान परिषद चुनाव
गाजियाबाद (युग करवट)। भारतीय जनता पार्टी में सबसे ज्यादा गुटबाजी दिखाई दे रही है। हर व्यक्ति अपने निजी स्वार्थ को लेकर काम कर रहा है। पार्टी के प्रति समर्पण की भावना अब पहले जैसी नहीं रही है। विधान परिषद चुनाव पर गौर करें तो यहां स्थिति कुछ अजीब दिखाई दी है।
विधान परिषद स्नातक के लिए जब तक दिनेश गोयल उम्मीदवार घोषित नहीं हुए थे तब तक कई लोगों को इस बात की उम्मीद थी कि उन्हें टिकट मिलेगा और बड़ी संख्या में उन्होंने अपने वोट बनाने की तैयारी कर ली थी। हजारों फॉर्म भर चुके थे और पूरी तरह से बकायदा बैठक करके तैयारी की जा रही थी। लेकिन जब दिनेश गोयल का टिकट हो गया तो फिर दावेदारों ने ऐसा रूप दिखाया जिससे ये बात साफ हो गई कि सबकुछ व्यक्तिगत ही रह गया और पार्टी के प्रति कोई भी समर्पण नहीं रहा। बताते हैं कि दावेदारों ने जो हजारों फॉर्म तैयार किये गये थे वो वोट नहीं बनवाये गये। यही कारण रहा कि पिछली चुनाव में तीन लाख के आसपास वोट बनाये गये थे क्योंकि दिनेश गोयल काफी पहले उम्मीदवार घोषित कर दिये गये थे और उन्होंने अपनी पूरी टीम लगाकर वोट बनवाये थे। गाजियाबाद में भी अश्वनी शर्मा पूरी मुस्तैदी के साथ वोट बनवाने में लगे थे और बहुत अच्छा मतदान हुआ था और भारी मतों से दिनेश गोयल जीते थे। इस बार दिनेश गोयल को टिकट मिलेगा या नहीं मिलेगा ये असमंजस बना हुआ था लेकिन पार्टी ने उन पर फिर भरोसा किया और देर से ही सही उन्हें उम्मीदवार घोषित किया।
दिनेश गोयल सभी को साथ लेकर चलते हैं और यही कारण था कि लोगों को उम्मीद थी कि पार्टी देर-सबेर उन्हें टिकट देगी। दिनेश गोयल को टिकट मिलने में मिजोरम के राज्यपाल जनरल वीके सिंह की भी जहां अहम भूमिका रही वहीं यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी टिकट दिलाने में उन्होंने अपना पूरा फर्ज निभाया। क्योंकि उम्मीदवार देरी से घोषित हुए इसलिए पिछली बार के मुकाबले इस बार वोट कम बने और मात्र गाजियाबाद में 22 हजार के आसपास वोटिंग हुई। हालांकि अन्य कोई उम्मीदवार मजबूती के साथ चुनाव में नहीं खड़ा था इसलिए परिणाम सकारात्मक ही आने की उम्मीद है। लेकिन जिस तरह दावेदारों ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई वो भी चर्चा का विषय बनी हुई है।
वहीं श्रीचंद शर्मा के मतदान में काफी जोश दिखाई दिया। हालांकि चर्चा इस बात की है कि गाजियाबाद में कुछ कॉलेज में उनके वोट नहीं बने थे लेकिन फिर भी जिस तरह वोट प्रतिशत रहा वो काफी अच्छा रहा। श्रीचंद शर्मा भी दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। पहले भी वो इस सीट पर कामयाब रहे थे।