सुब्रत भट्टाचार्य
गाजियाबाद। मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में गाजियाबाद के सांसद जनरल वीके सिंह विदेश राज्यमंत्री थे। बतौर विदेश राज्यमंत्री उन्होंने यमन के युद्धग्रस्त क्षेत्र से भारतीयों को ही नहीं बल्कि विदेशी नागरिकों को भी बाहर निकालने में बड़ी भूमिका अदा की थी। उनके इस कार्य के लिए पूरी दुनिया में उनकी तारीफ हुई थी। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसका जिक्र किया था।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में जनरल वीके सिंह को सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्यमंत्री के तौर पर कई महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्यवन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। यहां भी उन्होंने समय से पहले कई परियोजनाओं को पूरा कर अपनी कार्यशैली की एक अलग पहचान छोड़ी है। जनरल वीके सिंह सोमवार को युग करवट के प्रधान कार्यालय पहुंचे थे, जहां उन्होंने प्रधान सम्पादक सलामत मियां से कई विषयों को लेकर गहन मंत्रणा की। इस दौरान उन्होंने युग करवट से बातचीत की।
* मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के दौरान आपको सड़क परिवहन एवं राजमार्ग विभाग सौंपा गया। इस विभाग की परियोजनाएं प्रधानमंत्री की प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर है। जाहिर है आप पर इन परियोजनाओं को समय से पूरा कराने की गंभीर जिम्मेदारियां हैं। कौन-कौन सी परियोजनाओं पर काम चल रहा है और उनका स्टेटस क्या है?
-इस समय देश में भारतमाला परियोजना के तहत सड़कों का नेटवर्क बनाने का कार्य जोर-शोर से चल रहा है। यह परियोजना पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का सपना रहा है। उनके कार्यकाल के दौरान परियोजना को लॉन्च किया गया था। इसके तहत गुजरात, राजस्थान से शुरू होकर पंजाब, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड के तराई इलाकों के साथ उप्र और बिहार की सीमाओं को सड़क मार्ग से जोड़ा जाना है। दूसरे चरण में पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर तक सड़क विकसित कर भारत की सीमाओं को और अधिक सुरक्षित करना है। इस परियोजना की कुल लंबाई ५१ हजार किमी होगी। पहले चरण में २९ हजार किमी सड़क विकसित करना है। उत्तराखंड के चार धामों को भारतमाला परियोजना से जोडऩे की योजना है। इस पर काम चल रहा है। सिर्फ सड़क ही नहीं, सड़क के आसपास आर्थिक गतिविधियों के लिए कोरिडोर भी बनाए जा रहे हैं। अमृतसर-भटिंडा राष्ट्रीय राजमार्ग को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से जोडऩे का काम चल रहा है। जम्मू से श्रीनगर तक एक और राष्ट्रीय राजमार्ग बनाने का काम तेजी से जारी है।
पिछले दिनों जोजिला टनल का निरीक्षण किया। सभी कार्य समय के अनुसार चल रहे हैं। इसके अलावा मेरठ से प्रयागराज तक गंगा एक्सप्रेस-वे का कार्य भी जोर-शोर से चल रहा है। इस एक्सप्रेस-वे को एनएच-८ से जोड़ा जाएगा। इस योजना के पूरा होने पर दिल्ली से सीधे सड़क मार्ग से लखनऊ, प्रयागराज जाया जा सकता है। दिल्ली से मेरठ तक दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे शुरू हो गया है। इससे अब दिल्ली से मेरठ की काफी कम हो गई है। कम समय में ज्यादा दूरी तय करने के लिए एक्सप्रेस-वे का नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। भारतमाला और सागरमाला प्रोजेक्ट्स विकास के इंजन बनेंगे।
* सागरमाला प्रोजेक्ट को भी काफी अहम माना जा रहा है। यह भी आपके विभाग के अधीन ही आता है। क्या है सागरमाला प्रोजेक्ट?
उत्तर-२०१५ को कैबिनेट ने भारत के बंदरगाहों और १२०० द्वीप समूहों को विकसित करने के लिए सागरमाला प्रोजेक्ट को हरी झंडी दी गई थी। इस प्रोजेक्ट के तहत १४५०० किमी जलमार्ग और समुद्री मार्गों को विकसित करना है। इस पर भी तेजी से काम जारी है। इससे तटवर्ती इलाकों में विकास की नई गंगा बहेगी।
* लेकिन गाजियाबाद में आरओबी का काम अभीतक पूरा नहीं हो पाया, जबकि यह योजना २०१४ में स्वीकृत की गई थी। लेट होने के क्या कारण है?
यह सही है कि धोबीघाट आरओबी प्रोजेक्ट २०१४ में स्वीकृत हुआ था, लेकिन उस समय हमारी सरकार नहीं थी। दो साल तक प्रोजेक्ट यूं ही पड़ा रहा। २०१६ में रेलवे के साथ बातचीत की गई, लेकिन प्रोजेक्ट की लागत को लेकर रेलवे के साथ सहमति नहीं हो पाई। काफी प्रयास के बाद रेलवे राजी हुआ। इसकी लागत का ४० करोड़ रुपया मंत्रालय देने को तैयार हुआ। इसका डिजाइन बना, उसमें भी विवाद हो गया। क्योंकि डिजाइन में सेना की जमीन आ रही थी। सेना यह जमीन नहीं छोडऩा चाहती है। दोबारा डिजाइन बना। उसमें भी कई सौ मकान अवरोधक बन रहे थे। इन सभी मकानों को तोड़ा जाना था। लोगों को मनाने में काफी वक्त लग गया। दूसरी बात डिजाइन में फॉल्ट पाया गया, जिसके बाद फिर से डिजाइन बना। इस बीच कांट्रेक्टर का भी निधन हो गया। इन सभी वजहों से प्रोजेक्ट लेट हो गया। अब प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है। चुनाव से पहले लाइनपार क्षेत्र के लोगों आरओबी से आ-जा पाएंगे।
* अब राजनीति पर बात करते हैं। प्रियंका गांधी ने लखनऊ में डेरा जमा लिया है। वे कहती हैं कि जबतक गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा को बर्खास्त नहीं किया जाता तबतक उनका आंदोलन चलता रहेगा। क्या कहेंगे?
-देखिये, घटना की हकीकत कुछ होती है और कांगे्रस कुछ और ही कहती है। हाथरस की सच्चाई सबके सामने है। हाथरस की बेटी के साथ घटना को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। यही काम लखीमपुर खीरी मामले में भी किया जा रहा है। इस घटना में पुलिस ने मंत्री के आरोपी बेटे को हत्या जैसी संगीन धाराओं में गिरफ्तार कर लिया जबकि अभी इसकी जांच चल रही है कि मंत्री का बेटा घटनास्थल पर मौजूद था या नहीं। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की। गृह राज्यमंत्री का इस्तीफा मांगना राजनीति से प्रेरित है। मंत्री का बेटा अभी दोषी साबित नहीं हुआ है। फिर भी उसके पिता का इस्तीफा मांगना क्या सही है। दरअसल, कांगे्रस नेता लखीमपुर खीरी की घटना के बहाने पॉलिटिकल टूरिज्म कर रही है।
* भाजपा कहती है कि २०२२ विधानसभा चुनाव में उसकी ३५० से ज्यादा सीटें आएंगी। जबकि पिछले दिनों हुए एक सर्वे आया था जिसमें भाजपा को २६० के आसपास सीटें मिलती दिखाई गई थी। लोकप्रियता के मामले में भी अखिलेश यादव योगी आदित्यनाथ को कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
-देखिये, सर्वे होते हैं, सर्वे करने वालों का एक अपना क्राइटेरिया होता है, उस पर मैं कुछ नहीं कहूंगा, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि प्रदेश की जनता योगी सरकार के कामकाज से पूरी तरह संतुष्ट है। कानून व्यवस्था से लेकर सरकारी योजनाओं के लाभ लाभार्थियों तक पहुंचाने और सभी वर्गों के हितों के लिए योगी सरकार ने पूरी पारदर्शिता के साथ काम किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली सप्लाई की बात हो या गन्ना किसानों के बकाया भुगतान का मामला हो, हर कार्य को समय से पूरा किया है। पिछले साढ़े चार साल के दौरान प्रदेश में इतने कार्य हुए, जितने ४५ साल में नहीं हुए थे।
* विपक्ष का कहना है कि योगी सरकार में कानून व्यवस्था लचर रही है। कानपुर का बिकरू कांड हो या लखीमपुर खीरी की घटना, सरकार ने अपना काम सही तरीके से नहीं किया।
-विपक्ष को तो योगी सरकार के खिलाफ माहौल बनाना है। विपक्ष का काम ही यह है, लेकिन जनता पर विपक्ष के चीखने चिल्लाने का कोई असर नहीं हो रहा है। आज उप्र हर क्षेत्र में अग्रणी रहा है। चाहे कानून व्यवस्था हो या रोजगार उत्पन्न करना या फिर टीकाकरण अभियान, उप्र दूसरे राज्यों से कहीं आगे है। योगी सरकार के कार्यकाल में लोगों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। लोगों के जीवन स्तर में सुधार आया है।
* आपका संसदीय क्षेत्र किसान आंदोलन के केंद्र में रहा। पिछले १० महीने से किसान आंदोलनरत है। आखिर समाधान क्यों नहीं निकल रहा है?
-देखिये, यह आंदोलन मेरे संसदीय क्षेत्र में नहीं हो रहा है। यह गाजियाबाद की सीमा पर दिल्ली में हो रहा है। यह आंदोलन किसानों का नहीं बल्कि राजनीतिक दलों का हो गया है। अगर किसान होते तो इसका समाधान निकल जाता, लेकिन राजनीतिक दल समाधान नहीं चाहते हैं। उप्र चुनाव खत्म होते ही किसान आंदोलन भी समाप्त हो जाएगा। रही बात बातचीत की, केंद्र सरकार हर समय बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन कुछ तत्व ऐसे हैं जो बातचीत होने नहीं दे रहे हैं।
* कहा जा रहा है कि किसान आंदोलन को लेकर जाट समाज भाजपा से नाराज है और भाजपा नेतृत्व इससे परेशान है।
ऐसी बात नहीं है। जाट समाज भाजपा से नाराज नहीं है। बल्कि मैं तो कहूंगा कि भाजपा ने किसानों के लिए इतने काम किये जितने अजित सिंह भी नहीं कर पाए थे। किसानों को बरगलाया जा रहा है। हाल ही में संपन्न जिला पंचायत अध्यक्ष और ब्लॉक प्रमुख चुनाव में भाजपा को मिली जबरदस्त कामयाबी, इस बात को प्रमाणित करती है कि जाट समाज भाजपा से नाराज नहीं है। आप पश्चिम उप्र के किसी भी क्षेत्र में चले जाइये, सभी यह कहते मिलेंगे कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में किसानों की भलाई की है। विपक्षी पार्टियां दुष्प्रचार कर रही हैं कि जाट समाज हमसे नाराज है। नतीजे आने दीजिये, सब सामने आ जाएगा। हां यह बात कह सकता है कि कृषि और किसान को लेकर भाजपा की मार्केटिंग अच्छी नहीं रही है। अब हम सभी किसानों को अपनी बातें बता रहे हैं और वे समझ भी रहे हैं।
* आपके संसदीय क्षेत्र के तहत पांच विधानसभाएं आती हैं। अब जब विधानसभा चुनाव नजदीक है, विधायकों के कार्यों की समीक्षा होनी है। क्या ऐसा कोई विधानसभा क्षेत्र है जहां आपकी अपेक्षा के अनुसार, कार्य नहीं हुए हैं?
-देखिये, मैं अपने कार्यों के बारे में बता सकता हूं। हमारे सभी पांच विधायकों ने पूरे कार्यकाल के दौरान क्षेत्र के विकास पर जोर दिया। कई ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। बाकी मैं जनता पर छोड़ देता हूं।