युग करवट ब्यूरो
नई दिल्ली। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद उत्पन्न स्थिति और भारत की पॉलिसी को तय करने के लिए केंद्र सरकार ने आज सर्वदलीय बैठक बुलाई। बैठक में अफगानिस्तान के मौजूदा हालात पर सभी दलों की राय ली गई। साथ ही, वहां फंसे भारतीयों को निकालने पर भी चर्चा की गई। सूत्रों का कहना है कि फिलहास सरकार ने वेट एंड वॉच करने की नीति अपनाई है। दुनिया के दूसरे देशों का तालीबार के प्रति क्या रूख होगा, इसेदेखने के बाद ही कोई फैसला लिया जाएगा। बैठक में विपक्षी दलों ने विदेश मंत्री एस जयशंकर के प्रयासों की तारीफ की। बैठक के दौरान विदेश मंत्री ने अफगानिस्तान को लेकर राजनीतिक दलों के नेताओं को जानकारी दी और सवालों का जवाब दिया। सर्वदलीय बैठक में सरकार की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर, विदेश राज्य मंत्री मीनाक्षी लेखी, संसदीय कार्य मंत्री प्रहलाद जोशी, कॉमर्स मंत्री पीयूष गोयल, विदेश राज्य मंत्री मुरलीधरण और केंद्रीय मंत्री अर्जुन मेघवाल शामिल हुए। वहीं, विपक्ष की ओर से कांग्रेस के मलिकार्जुन खडग़े, अधीर रंजन चौधरी और आनंद शर्मा एनसीपी के शरद पवार, तृणमूल कांग्रेस के शुवेंदु शेखर रॉय और सौगत राय, डीएमके के तिरुचि शिवा, आरजेडी के प्रेमचंद गुप्ता, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी आदि शामिल हुए। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि भारत अब तक सिख और हिंदू समुदाय के अफगान समेत करीब 800 से ज्यादा लोगों को वापस ला चुका है। इनमें अफगानी नागरिक भी शामिल है। वहां की स्थिति पर चर्चा के लिए बुलाई गई ये सर्वदलीय बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री मोदी ने की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश मंत्रालय से जानकारी देने को कहा था। अफगानिस्तान में भारत के राजदूत रुद्रेंद्र टंडन और भारत के विदेश सचिव हर्ष श्रृंगला ने भी बैठक में भाग लिया। बैठक में अफगानिस्तान में तालिबान के आने के बाद भारत सरकार क्या कूटनीतिक कदम उठा रही है, इस पर भी चर्चा हुई।
तालीबान ने भारत से आर्थिक मदद की लगाई गुहार
तालीबान ने दुनिया के देशों से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है। इनमें भारत भी शामिल है। तालिबानी प्रवक्ता सुहेल शाहीन ने कहा कि अगर भारत की परियोजनाएं अफगानिस्तान में अधूरी हैं तो वे इसे पूरा कर सकते हैं। प्रवक्ता ने कहा कि भारत की कई परियोजनाएं अफगानिस्तान के लोगों के लिए अच्छी हैं, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए।