गाजियाबाद (युग करवट)। सिटी फॉरेस्ट को विकसित करने के दौरान एक बड़ी चूक हो गई थी। यहां करीब एक किसान की 14 हजार वर्ग मीटर जमीन पर कब्जा कर उस पर सिटी फॉरेस्ट विकसित कर दिया गया। अब यह मामला जीडीए, नगर निगम और यूपी सरकार के गले की फांस बन गया है, मामला अब हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। हालांकि जिस जमीन पर कब्जा किया है उसके मालिक के पक्ष में केस की सुनवाई जा रही है। इसी के बाद से प्रदेश सरकार की और से अब लैंड के संभावित एक्सचेंज की तैयारी की जा रही है। नगर निगम के संपत्ति विभाग का कहना है कि जिस जमीन पर जीडीए ने सिटी फॉरेस्ट को विकसित किया है वह पूरी जमीन नगर निगम के नाम है। इसी जमीन के बीचो-बीच करीब 14 हजार वर्ग मीटर जमीन एक प्राइवेट व्यक्ति की है। आरोप है कि इस जमीन को भी सिटी फॉरेस्ट में मिलाकर उसे फॅारेस्ट के रूप में विकसित कर दिया। लंबे समय से अपनी जमीन पर कब्जा लेने के लिए उसका मालिक नगर निगम के चक्कर काट रहा था। जब इसकी सुनवाई नहीं हुई तो मामला अब कोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट में अब सरकार को लगता है कि वह केस हार जाएगी। ऐसे में अब उस जमीन के बदले दूसरी जगह छोडऩे की कोशिश में शासन और प्रशासन जुट गया है। इसी के चलते ही अब लैंड की जांच शुरू हो गई है। माना जा रहा है कि जल्दी ही लैंड एक्सचेंज होगा।