युग करवट संवाददाता
नई दिल्ली। मोदी के दूसरे कार्यकाल का पहला कैबिनेट विस्तार बुधवार शाम हुआ। इससे पहले 13 मंत्रियों से उनके इस्तीफे लिए गए। अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं, जिनमें रविशंकर प्रसाद, प्रकाश जावड़ेकर, डॉ. हर्षवर्धन, रमेश पोखरियाल निशंक, थावरचंद गहलोत, बाबुल सुप्रियो और संतोष गंगवार समेत कई बड़े नाम शामिल हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। माना जा रहा है कि देश में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान स्वास्थ्य सेवाएं चरमराने की वजह से उनका पद छीन लिया गया। पश्चिम बंगाल की रायगंज लोकसभा सीट से भाजपा सांसद देबोश्री चौधरी ने भी अपना पद छोड़ दिया है। वह महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री थीं। सूत्रों का दावा है कि पश्चिम बंगाल भाजपा में उन्हें अहम पद दिया जा सकता है, जिसके चलते उनसे इस्तीफा लिया गया। उत्तराखंड की हरिद्वार लोकसभा सीट से सांसद रमेश पोखरियाल निशंक से भी इस्तीफा लिया गया। उनके पास मानव संसाधन विकास मंत्रालय का प्रभार था। स्वास्थ्य संबंधी कारणों के चलते निशंक को हटाया गया। पश्चिम बंगाल की आसनसोल लोकसभा सीट से सांसद बाबुल सुप्रियो ने भी इस्तीफा दे दिया। वह पर्यावरण मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। दावा किया जा रहा है कि सुप्रियो पार्टी से नाराज चल रहे थे। कर्नाटक की बेंगलूरू उत्तर लोकसभा सीट से भाजपा सांसद सदानंद गौड़ा ने भी इस्तीफा दे दिया। वह रासायनिक एवं उर्वरक मंत्री थे। सूत्रों के मुताबिक, सदानंद गौड़ा पर कोरोना काल में हुई दवाओं की कमी को लेकर गाज गिरी है, जिसके चलते मोदी सरकार की काफी फजीहत हुई थी। बरेली लोकसभा सीट से सांसद संतोष गंगवार को भी पद से हटा दिया गया। वह स्वतंत्र प्रभार से श्रम एवं रोजगार मंत्री थे। कोरोना काल में संतोष गंगवार की लिखी एक चि_ी काफी वायरल हुई थी, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार की आलोचना की थी।अंबाला लोकसभा सीट से सांसद रतन लाल कटारिया से भी इस्तीफा ले लिया गया है। वह जल शक्ति मंत्रालय में राज्य मंत्री थे। ओडिशा की बालासोर लोकसभा सीट से सांसद प्रताप सारंगी को भी इस्तीफा देने के लिए कहा गया है। वह सूक्ष्म, लघु और मध्यम के साथ पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन मंत्रालय के राज्य मंत्री थे।