रिटायर्ड जनरल वीके सिंह ने लोकसभा चुनाव लडऩे से इंकार क्या किया लोगों ने तरह तरह की बात बनानी शुरू कर दी। जो लोग आज भी जनरल साहब को अपना मानते हैं वह उनका इंतजार कर रहे हैं। जो उनके खिलाफ हैं उन्हें इस बात से भी तकलीफ होती है कि मोदी उन्हें कुछ दे ना दें। अब दस मई को जनलर साहब का जन्मदिन है। हर साल की तरह वह अपना जन्मदिन २/२७ राजनगर पर मनाएंगे। इसके लिए जोरशोर से तैयारी भी चल रही है। यूं तो वह कई साल से अपना जन्मदिन गाजियाबाद में मनाते आ रहे हैं। मगर इस बार इसकी अहमियत इसलिए बढ़ गई है क्योंकि लोकसभा चुनाव के बाद वह पहली बार अपना कोई निजी कार्यक्रम कर रहे हैं। जाहिर सी बात है इस बात से उनके समर्थक बहुत खुश हैं। लेकिन विरोधियों के सीने पर सांप लौट रहे हैं। इस बारे में पूर्व पार्षद हिमांशु लव ने बड़ी सटीक बात कही है। हिमांशु लव का कहना है कि जब जनरल साहब सांसद थे तो बड़ी संख्या में लोग राजनगर पहुंचकर उनको बधाई देते थे। बहुत से ऐसे लोग भी हैं जिनके ना जाने कितने काम जनरल साहब ने कराए हैं। अब परीक्षा ऐसे सभी लोगों की है। देखना है कि इस बार कितने लोग जनरल साहब को उनके जन्मदिन की शुभकामनाएं देने पहुंचते है। हिमांशु लव स्पष्टï कहते हैं कि जो जनरल साहब का सच्चा हितैषी कौन है? कौन वह लोग हैं जो दिल से जनरल साहब के मरीद हैं? और वह कौन हैं जो केवल सांसद होने की वजह से उनके पास जाते थे। ऐसे लोगों की पहचान होना भी जरूरी है जो केवल अपने निजी लालच से जनरल साहब के नजदीकी होने का स्वांग भरते थे। आने वाली दस मई को पता चलेगा कि जनरल साहब का असली सम्मान कौन कौन करता है। यह भी देखना दिलचस्प होगा कि कौन चोरी छुपे आएगा और कौन खुलकर। अपने पराए की पहचान भी जनरल साहब को हो जाएगी। अपनी अगली और नई पारी में जनरल साहब को ऐसे लोगों के लिए कुछ खास भी करना होगा जो आज भी उनके लिए कुछ कर गुजरने को तैयार बैठे हैं।