नगर संवाददाता
गाजियाबाद (युग करवट)। प्रधानमंत्री जनविकास योजना के तहत आज जिला मुख्यालय में सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग केन्द्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह की अध्यक्षता में आयोजित एक बैठक में प्रस्तावों पर चर्चा की गई। बैठक में ६६ करोड़ से अधिक के प्रस्तावों पर चर्चा की गई। केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह को पहले पुलिस गारद ने सलामी दी और इसके बाद वह जिला सभागार में पहुंचे। इस दौरान प्रधानमंत्री जनविकास कार्यक्रम के तहत जिले के चयनित क्षेत्र, जनपद के विभिन्न विभागों से योजना के तहत आए प्रस्तावों पर चर्चा की गई। इस दौरान बेसिक शिक्षा विभाग के १०२८.२४ लाख, यूपी नेडा के २२५.७० लाख, जिला खेल विभाग के ११०३.७२ लाख, क्षेत्रीय ग्राम्य विकास संस्थान के ६२.६२ लाख, जिला कार्यक्रम अधिकारी ४०६.०८ लाख, पशु चिकित्सा विभाग के ४०.१७ लाख, कृषि विज्ञान केन्द्र के ५५४.३० लाख, डीआईओएस के ५०९.८० लाख, सीएमओ के लिए १७७४.७४ लाख, खंड विकास भोजपुर के ४७७.६५ लाख, खंड विकास रजापुर के लिए ४२१.७६ लाख के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। बैठक में कुल ६६ करोड़ चार लाख ७८ हजार रुपए धनराशि के प्रस्तावों पर चर्चा की गई।
इस दौरान लोनी नगर पालिका चेयरमैन रंजीता धामा, डीएम आरके सिंह, सीडीओ विक्रमादित्य सिंह मलिक, डीआरडीए पीएन दीक्षित, डीडीओ रामउद्रेज यादव, डीआईओएस राजेश श्रीवास, डीपीओ शशि वाष्र्णेय, सीएमओ डॉ. भवतोष शंखधर, बीएसए विनोद मिश्र समेत अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
विकास कार्यों की बैठक में नहीं पहुंचे जनप्रतिनिधि
जिला मुख्यालय में आज प्रधानमंत्री जनविकास योजना के तहत विभागों द्वारा दिए गए प्रस्तावों पर चर्चा हुई, जिससे जिले में विकास के कार्यों को गति दी जा सके। इस बैठक में जिले के पांचों विधानसभा के विधायक, जिला पंचायत अध्यक्ष, मेयर, नगरपालिका के चेयरमैन को भी बुलाया गया था, लेकिन इस बैठक में महज लोनी नगर पालिका की चेयरमैन रंजीता धामा ही पहुंचीं।
अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस बैठक में शामिल होना भी जरूरी नहीं समझा। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब जिले के विकास के लिए बैठक आयोजित हुई हो और उसमें जनप्रतिनिधि शामिल हुए न हों। अक्सर विकास कार्यों की बैठक से जिले के जनप्रतिनिधि नदारद ही रहते हैं। जिससे लगता है कि जनप्रतिनिधियों को जिले के विकास से जैसे कोई लेना-देना ही नहीं है। जबकि, जिले में अगर कोई मंत्री या खुद सीएम आते हैं तो सभी जनप्रतिनिधि मौजूद दिखाई देंगे। लेकिन, जिले के विकास की बात होने पर जनप्रतिनिधि इन बैठकों से किनारा ही कर लेते हैं।