युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। पश्चिम उत्तर प्रदेश में सीट शेयरिंग को लेकर समाजवादी पार्टी और रालोद के बीच बनते-बनते भी बात बन नहीं पा रही है। सूत्रों के अनुसार, इसके पीछे तीस और चालीस का अंक आड़े आ रहा है। दरअसल, रालोद की ओर से पश्चिम में चालीस सीटों की डिमांड की जा रही है, जबकि अखिलेश यादव तीस सीटों से ज्यादा देने को तैयार नहीं है। रालोद की ओर से तीस सीटों के ऑफर को स्वीकार नहीं किया जा रहा है। इसी कारण गठबंधन की औपचारिक घोषणा होने में देरी हो रही है। सूत्रों का कहना है कि अगले दो दिनों के भीतर दिल्ली में अखिलेश और जयंत चौधरी के बीच फाइनल दौर की बातचीत होगी। उसमें सीटों को लेकर सहमति बनाने की पूरी कोशिश होगी।
रालोद सूत्रों का कहना है कि यह तो तय है कि आगामी विधानसभा चुनाव सपा और रालोद मिलकर लड़ेंगी। अब कितनी सीटों पर सपा लड़ेगी और कितनी और कौन-कौन सी सीटों पर रालोद, इस पर बातचीत जारी है। रालोद सूत्रों का कहना है कि कृषि कानूनों के विरोध में बने माहौल में भी पार्टी को कम से कम चालीस सीटें मिलनी चाहिए। सूत्रों का कहना है कि शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मेरठ, मथुरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, बुलंदशहर जिलों की कई सीटों पर रालोद ने जातिगत तरीके से मजबूत दावा किया है। संभव है कि दोनों दलों के शीर्ष नेता 21 नवंबर को लखनऊ में गठबंधन का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं। सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के जन्मदिवस 22 नवंबर से एक रोज पहले गठबंधन का ऐलान खासा महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सूत्रों के मुताबिक सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव रालोद को 32 सीटें देने को राजी है। हालांकि चुनाव के ऐन मौके पर इसमें कुछ संख्या बढ़ भी सकती है। यही नहीं जरूरत पडऩे पर रालोद से टिकट के कुछ मजबूत दावेदारों को सपा साइकिल सिंबल पर चुनाव लड़ा सकती है। पश्चिमी यूपी में अच्छा खासा जनाधार रखने वाले रालोद को अब किसान आंदोलन के चलते ज्यादा लाभ मिलने की उम्मीद है। हाल में सपा मुखिया अखिलेश यादव ने दिल्ली में रालोद प्रमुख जयंत चौधरी से मुलाकात कर सीटों को लेकर चर्चा की थी। कुछ सीटों पर पेंच फंसा है जिस पर जल्द सहमति बन जाएगी।