नगर संवाददाता
गाजियाबाद(युग करवट)। सावन का महीना शुरू होते ही शिवभक्त भगवान भोले का जलाभिषेक करने के लिए गौमुख, गंगौत्री, हरिद्वार की ओर निकल पड़ते हैं और शिवरात्रि तक शिवालयों में जलाभिषेक कर अपना संकल्प पूरा करते हैं। कांवडिय़ों का अब हरिद्वार से वापस लौटना शुरू हो गया है, हालांकि अभी दूर-दराज के शहरों के कांवडिय़ा ही लौट रहे हैं। शिवरात्रि का जलाभिषेक इस बार २६ जुलाई की रात नौ बजकर १५ मिनट पर शुरू होगा, जो अगले दिन २७ जुलाई की रात ९ बजकर ११ मिनट तक जारी रहेगा। २७ जुलाई को पूरा दिन चतुर्देशी रहेगी, इसके चलते २७ जुलाई को ही शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। शहर के ऐतिहासिक दूधेश्वरनाथ मंदिर में लाखों की संख्या में शिवभक्त जलाभिषेक करते हैं। दूधेश्वरनाथ मंदिर के महंत नारायण गिरी ने बताया कि वैसे तो सावन का पूरा महीना ही शिव को प्रिय होता है। लेकिन, शिवरात्रि पर जलाभिषेक करने से भगवान अपने भक्तों पर हमेशा कृपा बनाए रखते हैं। महंत नारायण गिरी ने बताया कि मंदिर में २५ से २७ जुलाई तक श्रावण मेले का आयोजन किया जाएगा। हजारों शिवभक्त हरिद्वार से जल लेकर मंदिर पहुंचते हैं, जिसमें वह सबसे पहले हाजिरी का जल चढ़ाते हैं।
हाजिरी का जल २६ जुलाई से शुरू होगा। इसके उपरांत चतुर्देशी का जलाभिषेक २६ जुलाई की रात ९ बजकर १५ मिनट से शुरू होकर २७ जुलाई रात ९ बजकर ११ मिनट तक जारी रहेगा। २७ जुलाई को ही शिवरात्रि का व्रत रखा जाएगा। पंडित शिवशंकर शर्मा ने बताया कि भगवान शंकर को भक्ति की भावना और आस्था प्रिय है। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक के अलावा गंगा जल, दूध-दही, शहद, पंचामृत आदि से स्नान कराना, भगवान शिव पर बेलपत्र, आक के पुष्प, भांग, धतूरा, भस्म आदि अर्पित करने का भी विधान है। विभिन्न प्रकार से भगवान का जलाभिषेक करने से लाभ होते हैं, जैसे शुद्ध जल से भगवान शिव को अभिषेक करने से घर में सुख समृद्धि बढ़ती है और अच्छी वर्षा होती है। दही से रुद्राभिषेक करने से भूमि भवन, गन्ने के रस से रुद्राभिषेक करने से लक्ष्मी प्राप्ति और समृद्धि के योग बनते हैं। सरसों के तेल से भगवान शंकर का अभिषेक करने से शत्रु पराजित होते हैं। गाय के दूध और गंगाजल से अभिषेक करने से वंश की वृद्धि होती है। शहद से रुद्राभिषेक करने से आरोग्यता बढ़ती है और टीबी जैसी भयंकर बीमारियां दूर होती हैं। गाय का दूध और घी मिलाकर के अभिषेक करने से पुत्र संतान की प्राप्ति होती है।
शक्कर मिले दूध से अभिषेक करने से लिए गृह शांति और जल में कुशा डालकर अभिषेक करने से असाध्य बीमारियां दूर होती है। अन्न दाल आदि से अभिषेक करने से घर में अन्नपूर्णा माता का आशीर्वाद मिलता रहता है।