एक विधायक का खुलासा

कहते हैं कि कभी-कभी बातों-बातों में ऐसे खुलासे भी हो जाते हैं कि जो जग जाहिर नहीं होते और बेवजह गलतफमियां रहती है। भाजपा के एक विधायक ने कुछ इस तरह के खुलासे किये जिससे ये बात समझ में आयी कि २०१९ में जो विधायक और तत्कालीन मेयर दिल्ली में अरुण जेटली के निवास पर गये थे उन्होंने खुलकर जनरल वीके सिंह का विरोध नहीं किया था। इतना ही नहीं विधायक ने बातो-बातों में ये भी बताया कि जो लोग खुद टिकट की दावेदारी करने गये थे वो उन्हें देखकर वहां से खिसक गये थे और आज वो जनरल साहब की गुडबुक में हैं। दरअसल, पांच विधायकों पर जनरल साहब का विरोध करने का आरोप है। इनमें से एक विधायक एक कार्यक्रम में मिले। बातों-बातों में उन्होंने कहा कि कभी भी जनरल साहब का विरोध ही नहीं किया गया। उन्होंने ये भी खुलासा किया कि २०१९ में अरुण जेटली जी से मुलाकात के दौरान सिर्फ ये कहा गया था कि यदि जनरल साहब नहीं लड़ते हैं तो आप लड़ लीजिए। अब इसमें जनरल साहब का विरोध कहां से आ गया। गुटबाजी को लेकर विधायक ने कहा कि कोई गुट ही नहीं है और अगर कहा जाए तो जनरल साहब भी हमारे ही गुट में हैं। विधायक जी का कहना था कि वो कोई विरोध नहीं कर रहे हैं। जनता चाहती है कि बदलाव हो। यदि होता है तो ठीक है वरना कल भी हमारे नेता जनरल साहब थे और आज भी हैं और पार्टी टिकट देगी तो पूरी मेहनत के साथ चुनाव लड़ाया जायेगा। उनका कहना था कि २०१४ में एक जनरल चुनाव लड़ा था। २०१९ में एक सांसद ने चुनाव लड़ा था और आज एक मजबूत राजनेता चुनाव लड़ेगा। उन्होंने कहा कि जिस तरह से छह महीने से जनरल साहब की सक्रियता है यदि यही सक्रियता पांच साल रहती तो शायद कोई सवाल ही नहीं उठता। बहरहाल विधायक की बातचीत से यही लगा कि कहीं ना कहीं थोड़ा बहुत विरोध है। उसके पीछे सम्मान अहम है। जो विधायक कहीं ना कहीं नाराज है उनकी पीड़ा यही है कि उनको जो सम्मान मिलना चाहिए था वो नहीं मिला। हालांकि डायरेक्ट तौर इसकेे लिए जनरल साहब को जिम्मेदार नहीं ठहरा रहे हैं। उनका यही कहना है कि जनरल साहब के इर्दगिर्द रहने वाले कुछ लोग नहीं चाहते कि आपस में समन्वय हो। बहरहाल विधायक ने पूरी बातचीत में जनरल साहब का कोई भी खुलकर विरोध नहीं किया। हो सकता है कि कहीं ना कहीं सम्मान की लड़ाई के चक्कर में दूरियां और बढ़ती गई। इन लाइनों के साथ अपनी बात समाप्त करता हूं-
हम बेवफा हरगिज ना थे,
पर हम वफा कर ना सके।
जय हिंद