युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। एक फिल्म आई थी ओमेर्ता, जो अंतराष्टï्रीय आतंकवादी अहमद उमर सईद शेख पर बनी थी। यही वह आतंकवादी है, जिसे पकडऩे के लिए सहारनपुर गई गाजियाबाद पुलिस टीम के साथ मुठभेड़ हो गई। इसी मुठभेड़ में साहिबाबाद थाने के इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव और सिपाही राजेश यादव शहीद हो गए थे। अहमद उमर सईद शेख वर्ष 1993-94 के आसपास भारत आता है और अपने आतंकी मंसूबों को पूरा करने की जुगत में रहता है। वह वर्ष 1994 में नई दिल्ली के पहाडग़ंज के एक होटल में तीन विदेशी नागरिकों के साथ दोस्ती करता है। इनमें 3 ब्रिटिश नागरिकों और 1 अमेरिकी नागरिक है। इन चारों को लेकर वह गाजियाबाद के मसूरी क्षेत्र में अपने किराए के मकान में आता है। यहां आने के बाद वह इन चारों को बंधक बना लेता है। यहीं से सहारनपुर मुठभेड़ की कहानी शुरू होती है। आतंकियों ने जेल में बंद अपने साथी अजहर मसूद को रिहा कराने के लिए विदेशियों का अपहरण किया था।
इस घटना से भारत ही नहीं, पूरी दुनिया को आतंकवाद से पहली बार परिचय कराया। दरअसल, जैश ए मोहम्मद के आतंकी अजहर मसूद को छुड़ाने के लिए आतंकियों ने 1994 में हापुड़ से तीन विदेशी नागरिकों का अपहरण कर लिया था और सहारनपुर के खाताखेड़ी में लाकर एक मकान में बंद करके रखा था। जिस कार से विदेशी नागरिकों को सहारनपुर लाया गया था, उसका ड्राइवर गाजियाबाद जनपद में पकड़ा गया था। आतंकियों के बारे में सटीक सूचना मिलने पर इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव ने पुलिस टीम के साथ खाताखेड़ी में उस मकान को घेर लिया था, जिसमें आतंकियों ने विदेशी नागरिकों को बंधक बना रखा था।
रात के अंधेरे में आतंकियों ने पुलिस पर गोलियां बरसा दी थीं, जिसमें इंस्पेक्टर ध्रुवलाल यादव और एक सिपाही शहीद हो गया था। कई आतंकी वहां से फरार हो गए थे, एक आरोपी को मार गिराने के बाद विदेशी नागरिकों को मुक्त करा लिया गया था। हालांकि इसके बाद मुजफ्फरनगर के गांव जौला से भी जैश ए मोहम्मद का एरिया कमांडर मोहम्मद वारस गिरफ्तार किया गया था। बाद में कांधार विमान अपहरण कांड में मौलाना अजहर मसूद को छोड़ा  गया था। जिस मकान में आतंकियों ने विदेशी नागरिकों को कई दिन तक बंधक बनाकर रखा था, उसमें अब पुलिस चौकी खाताखेड़ी चल रही है। आतंकियों ने तीनों विदेशी नागरिकों को पीछे की तरफ छोटे से कमरे में जंजीरों से बांधकर रखा था। 1994 में जब यह वारदात हुई थी, तो वहां इक्का दुक्का ही मकान थे, बाकी आसपास बाग था और प्लाटिंग हो चुकी थी। साल 1999 में पाकिस्तान परस्त आतंकी संगठनों से जुड़े आतंकियों ने नेपाल से इंडियन एयरलाइंस के विमान को अगवा लिया और उसे लेकर कंधार चले गए। यात्रियों को छोडऩे के एवज में आतंकी अहमद उमर सईद शेख, मसूद अजहर और मुश्ताक अहमद जरगार को छोडऩे की शर्त रखी। करीब 8 दिन बाद भारत सरकार यात्रियों की जान बचाने की खातिर आतंकियों की शर्त मान ली गई। और इन तीनों आतंकी को रिहा कर दिया गया। यही तीनों आतंकी आगे चलकर भारत के खिलाफ कई आतंकी साजिश रचते हैं। और आतंकी कार्रवाई में सैकड़ों लोगों की जान लेते हैं।
घटना के बारे में विस्तृत जानकारी पेज-४ पर।