युग करवट संवाददाता
गाजियाबाद। हाउस टैक्स के नोटिसों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब मुख्यमंत्री के दरबार तक पहुंच गया है। इस मामले में भाजपा पार्षद हिमांशु मित्तल ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर शिकायत की है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने बताया कि नगर निगम किस तरह से नोटिस भेज रहा है। 90 प्रतिशत नोटिसों में खामी है। नियमों के खिलाफ भेजे जा रहे इन नोटिसों पर निगम अधिकारियों के हस्ताक्षर तक नहीं है। उन्होंने नोटिसों को ही पूरी तरह से अवैध बताया है। मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में पार्षद मित्तल ने बताया कि गाजियाबाद महानगर में वर्ष 2000 से सेल्फ असेस्मेंट स्कीम लागू है। इसके साथ ही निगम को हाउस टैक्स के नोटिस देने का अधिकार समाप्त हो चुका है। निगम टैक्स के नोटिस के बजाय टैक्स के लिए सेल्फ असेस्मेंट फार्म का वितरण कर सकता है। अगर 25 प्रतिशत से कम टैक्स कोई भरकर देता है तो उसकी निगम जांच करा सकता है।
निगम अधिनियम की धारा 207 और 213 के तहत नोटिस जारी कर रहा है। इन धाराओं में निगम को हाउस टैक्स के नोटिस जारी करने का अधिकार भी नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि शायद निगम को इसकी जानकारी है इसी लिए जो नोटिस जारी किए जा रहे है उन्हें रिसीव भी नहीं कराया जा रहा है। अधिकारी नोटिस पर हस्ताक्षर किए बगैर ही उनका वितरण करा रहे है। पत्र में पार्षद मित्तल ने बताया कि 90 प्रतिशत नोटिस पूरी तरह से गलत है। कई नोटिसों में तो जीडीए के कवर्ड एरिया से भी अधिक प्लॉट कवर्ड एरिया दिखाकर टैक्स लगा दिया गया। गाजियाबाद में कवर्ड एरिया के हिसाब से हाउस टैक्स लगाने का प्लान है। निगम एकल युनिट के प्लॉट पर बने मकानों पर भी कारपेट के हिसाब से टैक्स लगा रहा है। नोटिसों में टैक्स बढ़ाया गया है। नोटिस को सेटेलाइट इमेजिंग सर्वे कर बनाए जाने पर भी उन्होंने सवाल खड़़े किए।