बीते सोमवार और मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नोएडा में रहे। कई कार्यक्रम में रहने के दौरान उन्होनें हर्ष अपहरण केस का खुलासा करने वाले पुलिस कर्मियों की पीठ थपथपाई उन्हें शाबासी भी दी। अच्दी बात है बच्चे को सकुशल बरामद करने पर पुलिस की सराहना होनी ही चाहिए। मगर अमित चौहान केस में नोएडा पुलिस की तत्परता कहां गायब हो जाती है, समझ नहीं आता। ग्रेटर नोएडा सेक्टर-2 की एरोस संपूर्णम सोसायटी में रहने वाले अमित चौहान 26 अगस्त से लापता हैं। दो महीने से ऊपर समय हो चुका है, अमित की पत्नी नेहा चौकी, थाने से लेकर बड़े अधिकारियों तक के चक्कर काट काट कर थक चुकी है। अकेली महिला परेशानी के किस दौर से गुजर रही है इसका अहसास न तो नोएडा पुलिस को रहा है और न सीएम ने ही उसके दर्द को महसूस किया है। हर्ष केस में नोएडा पुलिस की पीठ थपथपाने के बाद मुख्यमंत्री को एक सवाल अमित चौहान मिसिंग केस पर नहीं पूछना चाहिए था। सवाल यह है कि अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नोएडा की जांबाज पुलिस एक व्यक्ति को तलाश करने में विफल क्यों है? वह भी तब जबकि उसके क्रेडिट या डेबिट कार्ड से इस बीच कुछ खरीदा भी गया है। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि जांच अधिकारी ने पहले दिन से इस केस में लापरवाही बरती है। हर्ष अपहरण केस के खुलासे पर लोगों ने खुले दिल से नोएडा पुलिस की प्रशंसा की है, मगर अब अमित चौहान केस में लोग क्या कहें? हैरानी के बात यह है कि परेशान हाल घूम रही नेहा को न तो कहीं से कोई आश्वासन मिल रहा है और न केस की प्रगति पर कोई जानकरी मिल रही है। चौकी से थाने और वहां से अधिकारियों के दफ्तर चक्कर लगाने नेहा कि दैनिक दिनचर्या बन चुकी है। क्या नोएडा पुलिस से इस तरह की कार्यप्रणाली की उम्मीद की जानी चाहिए?